रामनगर (उत्तराखंड): उत्तराखंड के प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (Corbett Tiger Reserve) में आज (5 फरवरी 2026) से एक बड़ा नियम लागू हो गया है—सफारी के दौरान मोबाइल फोन ले जाना और इस्तेमाल करना पूरी तरह बैन कर दिया गया है। पर्यटकों को अब एंट्री गेट पर ही अपना मोबाइल जमा करना होगा। अगर कोई फोन लेकर पकड़ा गया, तो सख्त कार्रवाई होगी। यह नियम सभी पर्यटन जोनों (बीजरानी, ढिकाला, गर्जिया, झिरना आदि) में लागू है और गाइड्स, ड्राइवर्स तथा स्टाफ पर भी लागू होता है।
क्यों लगाया गया बैन?
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने TN Godavarman Thirumulpad मामले में निर्देश दिया कि टाइगर रिजर्व के कोर हेबिटेट और टूरिज्म जोनों में मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। यह आदेश मानवीय हस्तक्षेप (human interference) को कम करने के लिए है। राजाजी टाइगर रिजर्व में पहले से लागू हो चुका है, अब कॉर्बेट में भी लागू किया जा रहा है।
वन्यजीवों की सुरक्षा: मोबाइल से रिंगटोन, फ्लैश, सेल्फी लेने या टाइगर देखते ही दूसरी गाड़ियों को कॉल/मैसेज करने से जानवरों में तनाव बढ़ता है। इससे वे भागते हैं, छिपते हैं या आक्रामक हो जाते हैं। वाहनों की भीड़ लग जाती है, जो जानवरों के लिए खतरनाक है।
अनुशासन और बेहतर अनुभव: फोन से डिस्ट्रैक्शन कम होगा, पर्यटक प्रकृति पर फोकस करेंगे। प्रोफेशनल कैमरा (DSLR) अभी भी अनुमति है, लेकिन स्मार्टफोन नहीं।
कैसे लागू होगा नियम?
पर्यटकों को गेट पर फोन जमा करना होगा (सुरक्षित बॉक्स में रखा जाएगा)।
इमरजेंसी के लिए गाइड या स्टाफ के पास फोन रहेगा।
यह नियम दिन की सफारी और रात्रि विश्राम दोनों पर लागू है।
कॉर्बेट के डिप्टी डायरेक्टर राहुल मिश्रा ने कहा कि यह कदम वन्यजीव संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन के लिए जरूरी है। पहले से ही कई टाइगर रिजर्व (रंथंबोर, बांधवगढ़ आदि) में ऐसा बैन लागू हो चुका है।
फैंस और पर्यटकों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं—कुछ इसे अच्छा कदम बता रहे हैं, तो कुछ कह रहे हैं कि इमरजेंसी में फोन क्यों नहीं? लेकिन नियम साफ है—वन्यजीव पहले! अगर आप कॉर्बेट जाने वाले हैं, तो फोन घर पर छोड़कर जाएं और कैमरा साथ रखें।

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