

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने देश का पहला ‘अग्निवीर पुनर्रोजगार सेल’ स्थापित कर अग्निवीर योजना को धरातल पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष कर्नल अजय कोठियाल ने गुरुवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय में बताया कि इस सेल का उद्देश्य चार साल की सेवा के बाद सेना से लौटने वाले हर अग्निवीर को सम्मानजनक रोजगार से जोड़ना है। दिसंबर-जनवरी में सेना से पास आउट होने वाले पहले दो बैचों में राज्य के लगभग 1200 अग्निवीर शामिल होंगे। पहला बैच 31 दिसंबर और दूसरा 31 जनवरी को बाहर आएगा। इससे पहले भारतीय नौसेना के अग्निवीरों का पहला बैच 21 नवंबर को पास आउट होगा, उन्हें भी इस व्यवस्था में जोड़ा जाएगा।
कर्नल कोठियाल ने बताया कि सेल तीन स्तरों पर काम करेगा। इसमें सेवा से लौटे अग्निवीर, रोजगार देने वाली संस्थाएं और समन्वय स्थापित करने वाला पुनर्रोजगार सेल शामिल हैं। यह सेल सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन होगा और इसमें एक सेवानिवृत्त कर्नल, एक वरिष्ठ राज्य अधिकारी और विशेषज्ञों की टीम काम करेगी। टीम केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय, पैरामिलिट्री फोर्सेस, असम राइफल्स, राज्य सरकार के विभागों और कॉर्पोरेट समूहों से समन्वय कर हर अग्निवीर के लिए उपयुक्त अवसर तलाशेगी।
उन्होंने कहा कि सेना पहले से ही अग्निवीरों को विभिन्न स्किल्स में प्रशिक्षित कर रही है। सेल का काम उन स्किल्स का सर्टिफिकेशन करवाना और बाजार की मांग के अनुसार अतिरिक्त प्रशिक्षण देना होगा। साथ ही जो अग्निवीर आगे पढ़ाई या स्वरोजगार करना चाहते हैं उन्हें संबंधित योजनाओं और वित्तीय सहायता से जोड़ा जाएगा। पहले बैच के आने के बाद एक महीने का साइलेंट पीरियड रहेगा, इसके बाद पात्र अग्निवीरों को सेना में पुनः रिटेन करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
कर्नल कोठियाल ने अग्निवीर योजना पर विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि यह योजना राष्ट्रहित में है और जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम दिखेंगे। इस मौके पर प्रदेश सह मीडिया प्रभारी राजेंद्र नेगी और प्रदेश प्रवक्ता कमलेश रमन भी मौजूद थे।

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