राहुल गांधी की सुरक्षा उल्लंघन पर CRPF की चेतावनी, विदेश यात्राओं पर लगाए आरोप
नई दिल्ली: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। CRPF के वीवीआईपी सुरक्षा प्रमुख सुनील जून ने 10 सितंबर 2025 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को अलग-अलग पत्र लिखे हैं। इन पत्रों में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी अपनी Z+ (ASL) श्रेणी की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं ले रहे और बार-बार प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को जोखिम हो रहा है। यह मामला राजनीतिक हलकों में गरमा गया है, जहां BJP ने कांग्रेस पर निशाना साधा है, जबकि कांग्रेस ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है।
पत्रों में विशेष रूप से राहुल गांधी के पिछले नौ महीनों में छह विदेश दौरों का जिक्र किया गया है, जहां उन्होंने CRPF को पूर्व सूचना दिए बिना यात्रा की। CRPF की ‘येलो बुक’ प्रोटोकॉल के अनुसार, Z+ (एडवांस्ड सिक्योरिटी लायजन – ASL) सुरक्षा प्राप्त वीवीआईपी को विदेश यात्रा से कम से कम 15 दिन पहले अपनी सुरक्षा एजेंसी को सूचित करना अनिवार्य है। इसकी अनदेखी से सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी दिक्कतें आईं, क्योंकि ASL के तहत CRPF को यात्रा स्थलों का अग्रिम निरीक्षण करना पड़ता है, जिसमें स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय शामिल होता है। पत्र में कहा गया है कि इन उल्लंघनों से VVIP सुरक्षा की प्रभावशीलता कमजोर हो रही है और राहुल गांधी के लिए संभावित खतरे बढ़ सकते हैं।
CRPF ने निम्नलिखित विदेश दौरों को प्रोटोकॉल उल्लंघन का उदाहरण बताया है:
– इटली: 30 दिसंबर 2024 से 9 जनवरी 2025 (नए साल पर 10-11 दिन की यात्रा)
– वियतनाम: 12 मार्च से 17 मार्च 2025
– दुबई: 17 अप्रैल से 23 अप्रैल 2025
– कतर (दोहा): 11 जून से 18 जून 2025
– लंदन: 25 जून से 6 जुलाई 2025
– मलेशिया: 4 सितंबर से 8 सितंबर 2025
इन यात्राओं के दौरान सूचना न देने से CRPF को तत्काल सुरक्षा इंतजाम करने में कठिनाई हुई। मलेशिया यात्रा को BJP ने ‘उपविजेता चुनाव के बीच छुट्टी’ करार दिया, जहां राहुल गांधी की स्कूटर पर सवार होने और कतार में खड़े होने की तस्वीरें वायरल हुईं, जो बिना सुरक्षा के लगीं। CRPF ने चेतावनी दी है कि ऐसी लापरवाही से न केवल व्यक्तिगत खतरा बढ़ता है, बल्कि पूरी सुरक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
राहुल गांधी को Z+ श्रेणी की उच्चतम सुरक्षा प्राप्त है, जिसमें लगभग 55 सुरक्षाकर्मी, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) कमांडो और 10-12 सशस्त्र CRPF कमांडो हमेशा तैनात रहते हैं। ASL के तहत हर स्थान का पूर्व निरीक्षण अनिवार्य है। CRPF अधिकारियों ने इसे ‘नियमित संचार’ बताया, लेकिन जोर दिया कि पहले भी ऐसी चेतावनियां दी गई हैं। 2022 में CRPF ने दावा किया था कि 2020 के बाद से राहुल गांधी ने 113 बार सुरक्षा दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया, जिसमें भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी कई मामले शामिल थे। 2019 में SPG सुरक्षा हटाने के बाद CRPF ने यह जिम्मेदारी संभाली है।
इस मुद्दे पर BJP और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी हो रही है। BJP प्रवक्ता अमित मालवीय ने ट्वीट कर कहा, “राहुल गांधी क्या छिपा रहे हैं? ये संदिग्ध विदेश यात्राएं क्या दर्शाती हैं?” उन्होंने वियतनाम यात्राओं पर सवाल उठाए। BJP ने इसे ‘लापरवाही’ बताया और कहा कि इससे भारत की लोकतंत्र पर खतरा है। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पत्र के सार्वजनिक होने और समय पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “यह पत्र राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोपों के ठीक बाद आया है। क्या यह विपक्षी नेता को डराने की कोशिश है?” कांग्रेस ने इसे राजनीतिक हमला करार दिया और सरकार पर चुनाव आयोग की मिलीभगत के आरोपों से घबड़ाने का इल्जाम लगाया।
CRPF ने पत्र में राहुल गांधी और उनके स्टाफ से भविष्य में प्रोटोकॉल का सख्त पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सुरक्षा और राजनीति के बीच संतुलन का सवाल उठाता है। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे या कांग्रेस की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हाल ही में रायबरेली में BJP कार्यकर्ताओं द्वारा राहुल के काफिले को रोके जाने की घटना ने भी सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया है। यह विवाद राजनीतिक तनाव को और गहरा सकता है, खासकर आगामी चुनावी माहौल में।

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