जिलाधिकारी मंत्री का नौकर नहीं, बल्कि जनता का सेवक है – डॉ प्रतिमा सिंह

आपदा प्रबंधन के दौरान मंत्री गणेश जोशी और डीएम साविन बंसल के बीच तीखी नोकझोंक, वीडियो वायरल

देहरादून।  उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हाल ही में सहस्त्रधारा क्षेत्र में बादल फटने से भारी तबाही मच गई। भारी बारिश और बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया, जिसमें सड़कें धंस गईं, घर बह गए और कई लोग लापता हो गए। आपदा राहत कार्यों के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी जिलाधिकारी (डीएम) साविन बंसल के साथ तीखी बहस करते और उन्हें फोन न उठाने पर फटकार लगाते नजर आ रहे हैं। यह घटना पूरे देहरादून में चर्चा का विषय बनी हुई है और विपक्ष ने इसे सत्ता के नशे का उदाहरण बताते हुए कड़ी आलोचना की है।

वीडियो में मंत्री जोशी डीएम बंसल से सवाल करते दिख रहे हैं कि आपदा के दौरान फोन क्यों नहीं उठाया, जबकि अन्य सभी अधिकारी तुरंत उपलब्ध हो गए। मंत्री का कहना है कि यह लापरवाही आपदा प्रभावित लोगों के लिए घातक साबित हो सकती है। डीएम बंसल ने सफाई दी कि वे राहत कार्यों में व्यस्त थे, लेकिन बहस के बाद वे मौके से चले गए। यह वीडियो ट्विटर (एक्स) पर तेजी से फैल रहा है, जहां यूजर्स इसे प्रशासनिक असफलता और मंत्री- अधिकारी के बीच तनाव का प्रतीक बता रहे हैं।

यह घटना हाल ही में भाजपा नेता सिद्धार्थ अग्रवाल के होमस्टे पर आईपीएस अधिकारी कुश मिश्रा के साथ हुई बदसलूकी के महज एक हफ्ते बाद हुई है। कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, “भाजपा के विधायक, मंत्री और पदाधिकारियों पर सत्ता का नशा सिर चढ़कर बोल रहा है। गणेश जोशी को समझना होगा कि जिलाधिकारी उनका नौकर नहीं, बल्कि जनता का सेवक है।” डॉ. सिंह ने आगे कहा कि आपदा प्रवाह दौरे के दौरान इस तरह का दुर्व्यवहार अस्वीकार्य है और पूरी देहरादून में इसकी निंदा हो रही है।

इस संबंध में उत्तराखंड युवा प्रदेश इंटक के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता पंकज क्षेत्री ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मंत्री गणेश जोशी के आचरण की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह समय अधिकारियों का मनोबल बढ़ाने का है, न कि उन्हें अपमानित करने का।

क्षेत्री ने यह भी कहा कि मंत्री गणेश जोशी को यह स्मरण रहना चाहिए कि वह पहले से ही अधिक संपत्ति के मामले में आरोपी के घेरे में हैं और उनके विरुद्ध सीबीआई जांच चल रही है। ऐसे में उन्हें अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए संयमित व्यवहार करना चाहिए, न कि अधिकारियों के समक्ष अपनी हनक दिखाकर लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन करना चाहिए।

सूत्रों के अनुसार, यह विवाद सहस्त्रधारा रोड पर राहत कार्यों का जायजा लेने के दौरान हुआ। बादल फटने से प्रभावित क्षेत्र में मंत्री जोशी राहत सामग्री वितरण और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि डीएम के फोन न उठाने से कुछ महत्वपूर्ण निर्देश देरी से पहुंचे, जिससे राहत कार्य प्रभावित हुए। दूसरी ओर सूत्र बताते हैं कि डीएम -एसएसपी कि टीम भीषण आपदा प्रभावित क्षेत्र में ग्राउंड जीरो पर डटी रही और सभी अधिकारी पूरे मनोयोग से कार्यरत थे।

देहरादून में विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है। कांग्रेस ने कहा कि यह घटना उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय की पोल खोल रही है।

मंत्री गणेश जोशी के खिलाफ पहले भी कई विवादास्पद घटनाएं जुड़ी रही हैं, लेकिन वे हमेशा इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते आए हैं। फिलहाल, इस वायरल वीडियो ने राज्य सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और उम्मीद है कि जल्द ही आधिकारिक स्पष्टीकरण आएगा।

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