देहरादून: नारी निकेतन में संवासिनी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, जनप्रहार ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाये सवाल

देहरादून।  राजकीय नारी निकेतन में एक 35 वर्षीय संवासिनी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने राज्य के महिला सुरक्षा तंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। घटना के बाद जहां राज्य महिला आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं, वहीं सामाजिक संगठन “जन प्रहार” ने भी पूरे मामले को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग तेज कर दी है।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल स्वयं नारी निकेतन पहुंचीं और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने जिलाधिकारी सविन बंसल को स्पष्ट निर्देश दिए कि मामले की हर पहलू से गहन जांच कर विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि जिस संस्थान में महिलाओं की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी प्रशासन पर होती है, वहां इस प्रकार की घटना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृतका ममता (निवासी हमीरपुर, उत्तर प्रदेश) पिछले छह माह से नारी निकेतन में रह रही थी और उसका उपचार चल रहा था। बताया गया कि रात 11 बजे तक वह अपने बिस्तर पर थी, जबकि तड़के लगभग 3 बजे निरीक्षण के दौरान वह सीढ़ियों की रेलिंग से फंदे पर लटकी मिली। इस चार घंटे के अंतराल को लेकर महिला आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई है और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका की जांच के निर्देश दिए हैं।

आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं, जिनमें मानसिक रूप से अस्वस्थ संवासनियों के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल, सीसीटीवी कैमरों की संख्या में वृद्धि, नाइट शिफ्ट में अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती तथा संवेदनशील क्षेत्रों में 24 घंटे सक्रिय निगरानी शामिल हैं।

दूसरी ओर, सामाजिक संगठन “जन प्रहार” ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर और संदिग्ध बताया है। संगठन की संयोजक सुजाता पॉल और सहसंयोजक एडवोकेट पंकज सिंह क्षेत्री ने कहा कि बिना पूर्ण जांच के घटना को आत्महत्या मान लेना जल्दबाजी होगी। उन्होंने दावा किया कि संबंधित महिला अपने परिवार, विशेषकर पति, से नियमित संपर्क में थी और शीघ्र घर लौटने की तैयारी में थी, ऐसे में यह घटना कई सवाल खड़े करती है।

संगठन ने यह भी प्रश्न उठाया कि यदि महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ थी, तो उसकी उचित निगरानी, काउंसलिंग और चिकित्सकीय देखरेख क्यों सुनिश्चित नहीं की गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि उसका उपचार किस चिकित्सक द्वारा किया जा रहा था और देखरेख में कहां चूक हुई।

“जन प्रहार” के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट से मुलाकात कर इस बात पर आपत्ति जताई कि बिना जांच के घटना को आत्महत्या के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। साथ ही संगठन ने आरोप लगाया कि इस मामले को दबाने की कोशिश भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

मामले में विभागीय स्तर पर भी असमंजस की स्थिति सामने आई है। समाज कल्याण मंत्री खजान दास के कार्यालय ने इसे महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग का विषय बताया, जबकि महिला सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्य के कार्यालय से जानकारी मिली कि वह वर्तमान में शहर से बाहर हैं। संगठन ने मंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने के लिए समय मांगा है।

संगठन ने पांच प्रमुख मांगों के साथ सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है, जिनमें निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच, स्वतंत्र एजेंसी या मजिस्ट्रियल जांच, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका की जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई तथा नारी निकेतन जैसी संस्थाओं में सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना शामिल है।

संगठन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस मामले में सीधे हस्तक्षेप कर पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

उधर, जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि मृतका का पोस्टमार्टम कराया जा चुका है और मामले की जांच जारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नारी निकेतन की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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