भिक्षावृत्ति और बालश्रम के खिलाफ देहरादून मॉडल बना मिसाल, ‘आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर’ का मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण

157.60 लाख की लागत से बने राज्य के पहले सेंटर ने एक साल में 325 से अधिक बच्चों को बचाकर 200 से ज्यादा को स्कूल पहुंचाया

देहरादून । उत्तराखंड को भिक्षावृत्तिमुक्त बनाने के संकल्प को जमीन पर उतारने की दिशा में देहरादून जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी पहल अब एक सशक्त मॉडल के रूप में उभरकर सामने आई है। राज्य सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनपद देहरादून में स्थापित “आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर” का विधिवत लोकार्पण कर इसे जनमानस को समर्पित किया। राजा रोड स्थित साधुराम इंटर कॉलेज परिसर में लगभग 157.60 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह केंद्र राज्य का पहला आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर है, जिसका मूल उद्देश्य भिक्षावृत्ति और बालश्रम में संलिप्त बच्चों को सुरक्षित वातावरण देकर उनका पुनर्वास करना और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।

जिला प्रशासन की यह पहल महज एक भवन या योजना भर नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्वास का ऐसा जीवंत प्रयोग बन चुकी है, जिसने एक वर्ष के भीतर उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार अब तक 325 से अधिक बच्चों को बाल भिक्षावृत्ति और बालश्रम से रेस्क्यू किया जा चुका है, जबकि 200 से अधिक बच्चों का विद्यालयों में नामांकन कराया गया है। यही वजह है कि यह केंद्र अब एक गेमचेंजर संस्थान के रूप में देखा जा रहा है, जिसने जरूरतमंद और हाशिये पर खड़े बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव की शुरुआत की है।

इस केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल बच्चों को आश्रय नहीं दिया जा रहा, बल्कि उनके समग्र विकास पर व्यवस्थित रूप से काम हो रहा है। रेस्क्यू किए गए बच्चों के मानसिक और व्यवहारिक सुधार, यानी माइंड रिफॉर्म, के लिए योग, संगीत, खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों को केंद्र की कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया गया है। इसका उद्देश्य उन बच्चों को केवल तात्कालिक सुरक्षा देना नहीं, बल्कि उन्हें भय, असुरक्षा और उपेक्षा की मनःस्थिति से बाहर निकालकर आत्मविश्वास, अनुशासन और बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर करना है।

भिक्षावृत्ति और बालश्रम उन्मूलन के लिए जिला प्रशासन ने बहुस्तरीय रणनीति के तहत एक विशेष अंतरविभागीय टीम का गठन किया है। इस टीम में होमगार्ड, चाइल्ड हेल्पलाइन, शिक्षा विभाग, श्रम विभाग, पुलिस विभाग तथा विभिन्न गैर-सरकारी संस्थाओं को शामिल किया गया है। यह संयुक्त तंत्र लगातार समन्वय स्थापित कर रेस्क्यू अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित कर रहा है। प्रशासन का मानना है कि ऐसी सामाजिक बुराइयों से निपटने के लिए केवल छापेमारी नहीं, बल्कि संस्थागत सहयोग और सतत निगरानी जरूरी है।

शहर में भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों की पहचान और त्वरित रेस्क्यू के लिए तीन विशेष रेस्क्यू वाहन तैनात किए गए हैं, जो नियमित पेट्रोलिंग कर अभियान को गति दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर 16 होमगार्ड कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके। यह व्यवस्था इस परियोजना को केवल कागजी योजना न रहने देकर मैदान में सक्रिय और परिणामकारी अभियान का रूप देती है।

जिलाधिकारी ने कार्यभार संभालने के बाद इस प8रियोजना को प्राथमिकता में रखा और तेजी से इसकी आधारशिला तैयार कराई। इसके बाद दिसंबर 2024 में मुख्यमंत्री ने इस आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर का शिलान्यास किया था। जिला प्रशासन ने बेहद कम समय में इस परियोजना को धरातल पर उतारते हुए इसका संचालन शुरू कराया। वर्तमान में यह केंद्र आधुनिक संसाधनों और सुसज्जित भवन के साथ संचालित हो रहा है, जहां बालश्रम और भिक्षावृत्ति से रेस्क्यू किए गए बच्चों को सुरक्षित माहौल, शिक्षा और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

देहरादून जिला प्रशासन का यह अभिनव प्रयास न केवल भिक्षावृत्ति और बालश्रम उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भी साबित करता है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति, सामाजिक संवेदनशीलता और योजनाबद्ध क्रियान्वयन साथ हों तो व्यवस्था समाज के सबसे कमजोर तबके तक उम्मीद की रोशनी पहुंचा सकती है। देहरादून का यह मॉडल अब पूरे राज्य के लिए एक प्रेरक उदाहरण बनता दिखाई दे रहा है।

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