देहारादून को ट्रैफिक जाम के ‘बॉटलनेक’ से मिलेगी मुक्ति !

भंडारी बाग ROB अगस्त 2026 तक पूरा करने का अल्टीमेटम

देहरादून: राजधानी के सबसे व्यस्ततम और तंग हिस्से—सहारनपुर चौक से प्रिंस चौक के बीच—ट्रैफिक का दबाव अगले 11 महीनों में आधा हो जाने की उम्मीद बढ़ गई है। यह संभव होगा भंडारी बाग रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) के निर्माण कार्य के पूरा होने से, जिसका 5 साल से लंबा इंतजार किया जा रहा है।
शुक्रवार सुबह जिलाधिकारी (डीएम) सविन बंसल ने आरओबी की साइट का औचक निरीक्षण किया और निर्माण कार्य में हो रही सुस्ती पर ठेकेदार/कार्यदायी संस्था को कड़ी फटकार लगाई। डीएम ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि राज्य सरकार की यह अतिमहत्वकांक्षी परियोजना हर हाल में अगस्त 2026 तक पूरी हो जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाला प्रोजेक्ट: देरी बर्दाश्त नहीं
डीएम ने निरीक्षण के दौरान कार्यदायी संस्था/ठेकेदार की सुस्त चाल पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाला प्रोजेक्ट है और इसमें अब किसी भी कीमत पर देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी-भरे लहजे में कहा कि शहरवासियों को अधूरे प्रोजेक्ट की वजह से लगातार जाम और परेशानी झेलनी पड़ रही है, जो कि बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने निर्देश दिया कि निर्माण कार्य को तय समयसीमा में पूरा किया जाए, वरना जिम्मेदार अधिकारियों और संस्था को सीधे जवाबदेह ठहराया जाएगा।

यह ओवरब्रिज भंडारीबाग को रेसकोर्स चौक से जोड़कर प्रिंस चौक और हरिद्वार रोड के बीच यातायात को सुगम बनाएगा। इससे हरिद्वार बाईपास रोड, कारगी रोड और आसपास के लोगों को सहारनपुर रोड होकर प्रिंस चौक की तरफ नहीं जाना पड़ेगा।
निगरानी बढ़ी, नोडल अधिकारी नामित
प्रोजेक्ट की मॉनिटिरिंग को सख्त करते हुए डीएम ने एसडीएम सदर और लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के एक्सईएन को नोडल अधिकारी नामित किया है। ये दोनों अधिकारी रेलवे से गार्डर ब्रिज प्लेसमेंट और अन्य कार्यों की बारीकी से निगरानी करेंगे। जिलाधिकारी ने खुद भी प्रगति की नियमित समीक्षा करने का ऐलान किया।
वर्षों का इंतज़ार और बढ़ी हुई लागत
भंडारीबाग आरओबी का विचार वर्ष 2013 में आया था, जबकि शिलान्यास 2021 में हो सका। निर्माण कार्य में लेटलतीफी के चलते इसकी दो डेडलाइन (मार्च 2023 और मार्च 2024) पहले ही निकल चुकी हैं। अभी तक सिर्फ भंडारी बाग छोर पर आरओबी आकार ले सका है।
परियोजना में देरी का खामियाजा यह रहा कि निर्माण का जिम्मा संभालने वाली भारत सरकार की कंपनी ईपीआइएल (EPIL) को जनवरी 2025 में बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा। लेटलतीफी के कारण परियोजना की लागत भी 12.5 करोड़ रुपये बढ़ गई है।

नई कंपनी के लिए चरणवार लक्ष्य
अब टेंडर के माध्यम से लीशा कंपनी के साथ अनुबंध किया गया है। लोनिवि ने कंपनी को अवशेष कार्य को पूरा करने के लिए चरणवार लक्ष्य तय किए हैं:

  • 3 माह: 25% प्रगति
  • 6 माह: 50% प्रगति
  • 9 माह: 75% प्रगति
  • 12 माह (अगस्त 2026): काम पूरा
    अंडरपास और फुटपाथ की सुविधा
    लोनिवि के अनुसार, आरओबी के संशोधित डीपीआर में रेसकोर्स के छोर पर 7 मीटर चौड़ा अंडरपास बनाया जाएगा। यह सुरंग रेसकोर्स के पास एप्रोच रोड के नीचे होगी, जिससे आसपास के निवासियों को अनावश्यक रूप से सर्विस रोड पर विपरीत दिशा में नहीं चलना पड़ेगा।
    इसके अतिरिक्त, रेलवे लाइन के ऊपर 76 मीटर लंबे लोहे के स्ट्रिंग ब्रिज पर दोनों तरफ फुटपाथ बनेंगे और सीढ़ियां भी होंगी, जिससे पैदल चलने वाले लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।
    परियोजना पर एक नज़र विवरण |

    लंबाई | करीब 578 मीटर |
    कुल लागत | 43 करोड़ रुपये (यूटिलिटी शफ्टिंग सहित) |
    बढ़ी लागत | 12.5 करोड़ रुपये |
    कार्य की प्रगति | करीब 60 प्रतिशत |
    इस परियोजना के पूरा होने से सहारनपुर रोड और गांधी रोड पर वाहनों का दबाव कम होने के साथ-साथ आढ़त बाजार के जाम से भी निजात मिलने की उम्मीद है। जिलाधिकारी के कड़े रुख से अब लंबे समय से अटकी इस परियोजना के जल्द पटरी पर लौटने की उम्मीद जगी है।
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