धस्माना का सरकार पर वार: अस्पतालों का बकाया चुकाओ, मरीजों को बचाओ

सरकारी भुगतान में देरी से निजी अस्पतालों पर आर्थिक संकट, आयुष्मान समेत विभिन्न योजनाओं के मरीज हो रहे परेशान

देहरादून। प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत निजी अस्पतालों का लंबित भुगतान न किए जाने के कारण राज्य के प्रमुख अस्पताल आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। इसका सीधा असर आम मरीजों पर पड़ रहा है, जो आयुष्मान कार्ड, गोल्डन कार्ड, ईएसआईसी और एसजीएचएस जैसी योजनाओं के तहत उपचार के लिए भटकने को मजबूर हैं।

यह आरोप एआईसीसी सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने अपने कैंप कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रमुख निजी अस्पताल—हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट, महंत इंद्रेश अस्पताल देहरादून और ग्राफिक एरा अस्पताल सेलाकुई—का विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत अरबों रुपये का भुगतान राज्य सरकार द्वारा लंबित रखा गया है। इससे इन संस्थानों के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

धस्माना ने विशेष रूप से महंत इंद्रेश अस्पताल का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अस्पताल का अकेले राज्य सरकार पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है, जिसमें आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत ही 44 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत देश के प्रधानमंत्री की सर्वाधिक प्रचारित स्वास्थ्य योजना है, किंतु राज्य स्तर पर उसके भुगतान में लापरवाही गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

उन्होंने बताया कि हिमालयन अस्पताल, महंत इंद्रेश अस्पताल और ग्राफिक एरा अस्पताल न केवल सामान्य मरीजों का इलाज करते हैं, बल्कि राज्य के विभिन्न सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पतालों से रेफर होकर आने वाले गंभीर रोगियों का भी उपचार करते हैं। इन अस्पतालों में कैंसर, हृदय रोग, लिवर, किडनी और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों का इलाज होता है। ऐसे में यदि भुगतान में देरी के कारण अस्पताल योजनाओं के कार्डधारकों का इलाज करने में आनाकानी करते हैं तो इसका सबसे बड़ा खामियाजा गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों को भुगतना पड़ता है।

धस्माना ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति सरकार की उदासीनता को दर्शाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो अस्पताल राज्य की जनता को बेहतर और अपेक्षाकृत सस्ता इलाज उपलब्ध करा रहे हैं, उन्हें उनके वैध भुगतान के लिए परेशान किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने यह भी कहा कि वे शीघ्र ही इन अस्पतालों पर राज्य सरकार के कुल बकाया भुगतान का विस्तृत ब्यौरा एकत्र कर मुख्यमंत्री को सौंपेंगे और तत्काल भुगतान की मांग करेंगे, ताकि योजनाओं के तहत आने वाले मरीजों को इलाज से वंचित न होना पड़े।

इस पूरे प्रकरण ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और आम जनता को राहत कब तक मिल पाती है।

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