पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 138वीं जयंती पर उपमुख्यमंत्री ने अर्पित की श्रद्धांजलि, उनके योगदान को किया स्मरण

लखनऊ 10 सितंबर (आरएनएस )। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, स्वतंत्र भारत के उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री, भारत के पूर्व गृहमंत्री तथा भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 138वीं जयंती पर लोक भवन स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने पंडित पंत को भारत माता का महान सपूत बताते हुए प्रदेशवासियों की ओर से उनके समाज और राष्ट्र के लिए किए गए योगदान को स्मरण करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उन्होंने स्वाधीनता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया और आज़ादी के बाद उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा की। श्री मौर्य ने कहा कि पंडित पंत ने उस समय प्रदेश की प्रगति के लिए विकास का एक नया मॉडल प्रस्तुत करने का प्रयास किया। उनकी दूरदृष्टि और नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके साथ ही उन्होंने भारत के गृहमंत्री के रूप में देश की सेवा की और प्रशासनिक कुशलता का परिचय दिया।श्री मौर्य ने कहा कि पंडित पंत का कार्यकाल प्रदेश के लिए मार्गदर्शक रहा है। उन्होंने कहा,  उत्तर प्रदेश को उस समय आगे बढ़ाने के लिए जो विकास का मॉडल उन्होंने दिया, उसके लिए मैं उन्हें हृदय से नमन करता हूं। उनके विचार और योगदान आज भी प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक ने भी पंडित गोविंद बल्लभ पंत के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि पंडित पंत का जीवन समर्पण और सेवा का आदर्श है। उनके योगदान ने न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश की दिशा और दशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम उनके आदर्शों को अपनाकर समाज और राष्ट्र की उन्नति में योगदान दें।इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर पंडित गोविंद बल्लभ पंत के विचारों और योगदान को स्मरण करते हुए श्रद्धा से पुष्प अर्पित किए और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में स्वाधीनता संग्राम, विकास और जनसेवा में उनके योगदान को विस्तार से याद किया गया।यह आयोजन उनके आदर्शों, संघर्ष और नेतृत्व को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रेरक प्रयास बना। उपस्थित जनों ने यह संकल्प लिया कि वे समाज निर्माण और राष्ट्र सेवा में पंडित पंत के योगदान को याद रखते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे।

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