हिमालय बचाने के संकल्प के साथ साइकिल से चारधाम यात्रा पर निकले युवा, केदारनाथ की कठिन चढ़ाई भी की पार

उत्तरकाशी/केदारनाथ। देहरादून के साहसिक साइकिलिंग समूह “पहाड़ी पेडलर” द्वारा हिमालय संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के उद्देश्य से शुरू किया गया विशेष चारधाम साइकिल अभियान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। 26 अप्रैल से 16 मई 2026 तक आयोजित इस अभियान के तहत युवा साइकिलिस्ट कठिन पर्वतीय मार्गों और प्रतिकूल मौसम के बीच लोगों को हिमालय बचाने का संदेश दे रहे हैं।

इस पर्यावरण जागरूकता यात्रा में दिनेश थपलियाल, सागर क्षेत्री, देबू थापा और हिमालय गिरी प्रमुख रूप से शामिल हैं। टीम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, तुंगनाथ होते हुए बद्रीनाथ धाम तक साइकिल यात्रा कर रही है। यात्रा का उद्देश्य हिमालयी ग्लेशियरों के संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त वातावरण, स्वच्छ नदियों और हिमालय की जैव विविधता को बचाने के प्रति लोगों को जागरूक करना है।

यात्रा के दौरान टीम ने केदारनाथ धाम की दुर्गम चढ़ाई भी साइकिल के साथ सफलतापूर्वक पूरी की। टीम सदस्यों ने बताया कि भीमबली से आगे लगातार बारिश शुरू हो गई थी, जबकि बेस कैंप के समीप उन्हें बर्फबारी का भी सामना करना पड़ा। खराब मौसम और चुनौतीपूर्ण रास्तों के बावजूद उनका उत्साह कम नहीं हुआ और उन्होंने बाबा केदार के आशीर्वाद से यह कठिन पड़ाव पूरा किया।

उत्तरकाशी स्थित श्याम स्मृति वन में आयोजित कार्यक्रम में इन युवा साइकिलिस्टों का भव्य स्वागत और सम्मान किया गया। हिमालय प्लांट बैंक के अध्यक्ष एवं पर्यावरणविद् प्रताप सिंह पोखरियाल ने कहा कि हिमालय केवल पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन और संस्कृति का आधार है। ऐसे अभियान समाज को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि बढ़ता प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और अनियंत्रित पर्यटन हिमालयी क्षेत्रों के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। बुग्यालों और ग्लेशियरों पर प्लास्टिक और मानव गतिविधियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप केदारनाथ, रैणी गांव और धराली जैसी आपदाएं सामने आ रही हैं। हिमालय की संवेदनशीलता को समझते हुए सरकार और समाज दोनों को गंभीर कदम उठाने होंगे।

अभियान के दौरान टीम स्थानीय स्कूलों और गांवों में भी पहुंचकर लोगों और विद्यार्थियों को स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है। साइकिलिस्टों का कहना है कि धार्मिक स्थलों का अनियंत्रित व्यावसायीकरण रोकना और संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में सख्त पर्यावरणीय नियम लागू करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

इस अवसर पर गंगा विश्व धरोहर मंच के संयोजक डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल, राघवेंद्र उनियाल, सुमेरा प्रजापति, मनीष राणा, मयंक, श्रेयश सहित अनेक पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने युवाओं के इस अभियान को हिमालय संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल बताया।

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