रुद्रप्रयाग जनपद में डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क तैयार

रुद्रप्रयाग(आरएनएस)।  रुद्रप्रयाग जनपद में जिलाधिकारी सौरभ गहरवार के प्रयासों से डीडीआरएन यानि डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क को धरातल पर उतार दिया गया है। जनपद के 250 किमी क्षेत्र में वायरलेस सिस्टम से इंटरनेट की सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन के अनुसार यह रुद्रप्रयाग ऐसा पहला जिला है जिसके पास स्वयं का नेटवर्क है। आगामी 2 मई से केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू हो रही है ऐसे में यह नेटवर्क जहां आपदा की स्थिति में रामबाण साबित होगा वहीं यात्रियों की सुविधा, यात्रा मार्ग की जानकारी और सूचनाओं के आदान-प्रदान में काफी मददगार साबित होगा। गौरीकुंड से लेकर केदारनाथ धाम तक 16 किमी केदारनाथ पैदल मार्ग की स्थिति काफी संवेदनशील रहती है। कई बार ऐसी स्थिति देखने को मिली है जब यहां सम्पर्क करना प्रशासन और आम लोगों के लिए टेड़ी खीर साबित होता है ऐसे में अब, डीडीआरएन से संचार सुविधा में बेहतर लाभ मिलेगा। जिलाधिकारी सौरभ गहरवार ने बताया कि इंट्रानेट एक सॉफ्टवेयर है, जिसका प्रयोग सूचना के आदान-प्रदान और नेटवर्क की सुरक्षा के लिए किया जाता है। केदारनाथ धाम की यात्रा में देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं ऐसे में यहां व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए यह इंट्रानेट तैयार किया गया है। यह आपदा की दृष्टि में मजबूत संचार नेटवर्क देने में मददगार होगा। जिलाधिकारी ने बताया कि रुद्रप्रयाग देश का पहला ऐसा जिला होगा जिसने अपना स्वयं का इंट्रानेट स्थापित किया है। इस नेटवर्क की सबसे बड़ी खूबी है कि यह किसी भी प्रकार की आपदा या अन्य विषम परिस्थितियों में भी बंद नहीं होगा।
यह वायरलेस सिस्टम जनपद के 250 किमी क्षेत्र में फैला है। नेटवर्क से जहां बातचीत करने की सुविधा मिलेगी वहीं डाटा भी उपलब्ध होगा। इस सिस्टम को डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क कहा गया है। जिलाधिकारी ने बताया कि डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क से जिले के इंटर कॉलेजों को भी जोड़ा गया है। इंटर कॉलेजों में डाटा उपलब्ध कराकर छात्रों की ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। प्रथम चरण में जखोली और अगस्त्यमुनि ब्लॉक के करीब 36 इंटर कॉलेजों को डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर रिस्पोंस नेटवर्क से जोड़ा गया है, आने वाले समय में ऊखीमठ ब्लॉक के इंटर कॉलेजों को भी इसका लाभ दिया जाएगा। यहीं नहीं जनपद के सभी कार्यालयों और ई-डिस्ट्रिक्ट कार्यालयों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा गया है। ग्राम पंचायत स्तर पर पंचायत भवन को भी नेटवर्क की सुविधा दी जा रही है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी तरह से मुश्किल हालात में प्रशासन को तुरंत जानकारी मिल सके। इधर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि इस सिस्टम से आपदा के वक्त सबसे ज्यादा मदद मिलेगी। उन्होंने इस सिस्टम को बड़े स्तर पर फैलाने के लिए जिलाधिकारी का आभार जताया है।
यहां लगे हैं टॉवर
डीडीआरएन मोबाइल नेटवर्क का प्रमुख सेंटर आपदा कंट्रोल रूम में स्थापित किया गया है। जहां पूरे सिस्टम की मॉनीटरिंग की जाएगी। जबकि डुंगरी, बावई, राइंका तैला, राइंका जाखाल, राइंका जवाड़ी, राइंका पांजणा, बजीरा, राइंका त्यूंखर, बजीरा, तिमली, सकलाना, भीरी, चन्द्रापुरी, कार्तिक स्वामी, मणिगुह, घिमतोली, चन्द्रनगर, भणज, चिरबटिया, सकलाना, सोनप्रयाग, त्रियुगीनारायण, गुप्तकाशी, जग्गी बगवान, मनसूना, पैंज, लिनचोली, रुद्रा प्वाइंट में इसके टॉवर स्थापित किए गए हैं।

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