(सोशल मीडिया के प्रभाव और पारिवारिक नाराजगी बने प्रमुख कारण)
देहरादून, 14 सितम्बर।दून पुलिस ने बीते दो माह के भीतर गुमशुदा हुए 97 नाबालिगों के मामलों में त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई करते हुए 87 बच्चों को सकुशल बरामद कर उनके परिवारों से पुनः मिलाया है। ये बच्चे दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान समेत विभिन्न राज्यों से खोजे गए।
पुलिस जांच में सामने आया कि गुमशुदगी के पीछे कई कारण रहे—62 बच्चे अपने परिजनों से नाराज होकर घर छोड़ गए थे, जबकि 24 बच्चे सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर या घूमने की चाह में बिना बताये निकल पड़े। वहीं 11 मामलों में बच्चों को अन्य व्यक्तियों द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाया गया, जिन पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सभी अभियुक्तों को जेल भेजा गया।
दून पुलिस ने इन मामलों में न केवल बच्चों को सुरक्षित वापस लाने का प्रयास किया, बल्कि उनके अभिभावकों की काउंसलिंग भी की, ताकि वे बच्चों की भावनात्मक जरूरतों को समझ सकें और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
वर्तमान में 10 अन्य नाबालिगों की तलाश जारी है। इनमें से कुछ से सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क स्थापित किया गया है। उदाहरणस्वरूप, पटेलनगर क्षेत्र की एक युवती लुधियाना में कार्यरत पाई गई, जिसने वीडियो कॉल पर पुलिस को अपनी मर्जी से बाहर जाने और जल्द लौटने की जानकारी दी। प्रेमनगर क्षेत्र के एक नाबालिग ने परिजनों द्वारा फोन रीचार्ज न कराने से नाराज होकर बाहर काम की तलाश में जाने की बात बताई।
दून पुलिस ने इन सभी मामलों में संजीदगी से कार्य करते हुए बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। यह अभियान न केवल पुलिस की तत्परता का प्रमाण है, बल्कि समाज को बच्चों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति को समझने की दिशा में भी एक संदेश देता है।

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