

देहरादून। कहते हैं जब घर के बाहर ढोल-नगाड़े बजते हैं, तो मोहल्ले वाले मिठाई का डिब्बा ढूंढने लगते हैं। मेहुवाला के नया नगर में भी बुधवार को कुछ ऐसा ही हुआ। जब गली में ज़ोर-दार ढोल बजा, तो पड़ोसी बालकनी से झांकने लगे कि आखिर किसकी बारात आई है? लेकिन जब उन्होंने सामने पुलिस की वर्दी देखी, तब समझ आया कि मामला ‘बैंड-बाजा-बारात’ का नहीं, बल्कि ‘बैंड-बाजा-कुर्की’ का है!
मामला दरअसल कुछ यूं है कि जनाब आसिफ बाबा उर्फ आसिफ मलिक (पुत्र मोहम्मद यासीन) पर आरोप है कि उन्होंने 28 जून को एमजे टावर के बेसमेंट में प्रियांश जैन नाम के बंदे पर अपने साथियों के साथ धारदार हथियारों से ऐसा ‘स्टंट’ दिखाया कि सीधे अस्पताल पहुंचा दिया। वारदात के बाद से ही आसिफ बाबा पुलिस को ऐसे छका रहे थे जैसे कोई मिस्टर इंडिया का गैजेट पहनकर घूम रहे हों।
पुलिस ने काफी इंतजार किया, कोर्ट से गैर-जमानती वारंट भी कटवाया, पर आसिफ बाबा प्रकट ही नहीं हुए। आखिर में तंग आकर दून पुलिस ने कहा— “तुम सामने नहीं आओगे, तो हम ढोल बजाकर पूरी दुनिया को बताएंगे!”
बस फिर क्या था! पुलिस टीम 5 अगस्त (यानी आज) ढोल-नगाड़ों की पूरी ताल के साथ आसिफ बाबा के घर पहुंची। दो गवाहों की मौजूदगी में ढोल की हर बीट पर मुनादी कराई गई कि— “आसिफ बाबा, जहां कहीं भी हो, चुपचाप कोर्ट के सामने पेश हो जाओ, वरना अगली बार ढोल के साथ घर का सामान भी उठ जाएगा!”
पुलिस ने पूरे मोहल्ले और मुख्य चौराहों पर 84 BNSS (पूर्व धारा 82 CrPC) के तहत कुर्की का नोटिस चस्पा कर दिया है। अब मोहल्ले वाले चाय की चुस्कियों के साथ हंसते हुए कह रहे हैं— “बाबा जी की पोल भी खुली, और वो भी पूरे गाजे-बाजे के साथ!”
अब देखना यह है कि ढोल की यह गूंज आसिफ बाबा के कानों तक कब पहुंचती है और वे कोर्ट में सरेंडर करते हैं या पुलिस अपने अगले ‘रॉक शो’ (कुर्की कार्रवाई) की तैयारी करती है!

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