देहरादून। इस साल रक्षाबंधन पर देहरादून में बनी खास ‘ईको फ्रेंडली सीड राखियों’ की धूम मची हुई है। ये राखियां न केवल भाई-बहन के प्यार का प्रतीक हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का एक मजबूत संदेश भी दे रही हैं। इन राखियों को तुलसी, अपराजिता, बेल, अश्वगंधा और सूरजमुखी जैसे हर्बल पौधों के बीजों से तैयार किया गया है। रक्षाबंधन के बाद इन राखियों को गमले या बगीचे में बोया जा सकता है, जिससे एक नया पौधा जन्म लेगा।

देहरादून की महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार की गई इन सीड राखियों का उद्देश्य पर्यावरण को बचाना है। विकास भवन सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने इन राखियों का अनावरण किया और स्कूली बच्चों को वितरित कीं। उन्होंने कहा कि यह पहल भाई-बहन के अटूट प्रेम के साथ-साथ प्रकृति के प्रति हमारे कर्तव्य को भी याद दिलाती है। सीडीओ ने सभी से अपील की कि वे इन ईको फ्रेंडली राखियों को अपनाकर पर्यावरण को बचाने में सहयोग करें।

जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, डॉ. मिथिलेश कुमार, ने बताया कि इन राखियों को खास तरह से डिजाइन किया गया है। राखी के कागज को मिट्टी में दबाने से कुछ ही दिनों में एक हर्बल पौधा उग आएगा। इस पहल का मकसद बच्चों और युवाओं में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। भारतीय ग्रामोत्थान संस्था के तहत मोहिनी स्वयं सहायता समूह और हरिओम स्वयं सहायता समूह जैसे नौ महिला समूह मिलकर इन राखियों का उत्पादन कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में कई अन्य अधिकारी और शिक्षक भी मौजूद थे, जिन्होंने इस अनूठी पहल की सराहना की।

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