शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं, जीवन कौशल और संस्कार भी जरूरी : डॉ गीता खन्ना

नई दिल्ली / देहरादून। नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ के शुभ अवसर पर उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना  ने बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए शिक्षा की व्यापक परिभाषा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह समय नई ऊर्जा, नए संकल्प और नए सपनों के साथ आगे बढ़ने का है, जहां बच्चों और अभिभावकों का उत्साह ही भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है।

एक सार्वजनिक संबोधन डॉ गीता खन्ना ने कहा कि शिक्षा केवल अंकों और पुस्तकों तक सीमित नहीं है। विद्यालय का वास्तविक उद्देश्य बच्चों में संस्कार, अनुशासन और सशक्त व्यक्तित्व का निर्माण करना होना चाहिए। अभिभावकों से आग्रह किया गया कि वे ऐसे विद्यालयों का चयन करें, जो बच्चों को महज पढ़ाई ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाएं।

डॉ गीता खन्ना  ने वर्तमान समय में देखी जा रहीं चिंताजनक घटनाओं—जैसे स्कूल बस दुर्घटनाएं, बच्चों में बढ़ती आक्रामकता, तथा मानसिक दबाव में लिए जा रहे गलत कदम—का हवाला देते हुए कहा कि यह घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम बच्चों को सही दिशा दे पा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अब समय आ गया है कि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को जीवन कौशल (Life Skills), भावनात्मक संतुलन और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जाए।

अभिभावकों को विशेष रूप से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ प्रेम और संवाद बनाए रखें। उन्हें समय दें, उनकी बात सुनें और उनके मित्र बनें, क्योंकि एक मजबूत परिवार ही बच्चे के आत्मविश्वास और संस्कारों की नींव रखता है।

विद्यालयों से अपेक्षा की गई कि वे स्वयं को केवल शिक्षा देने वाली संस्था तक सीमित न रखें, बल्कि एक संस्कारिक परिवार के रूप में विकसित करें, जहां बच्चों को सुरक्षा, अनुशासन और नैतिक शिक्षा का वातावरण मिले।

डॉ गीता खन्ना के द्वारा फीस संबंधी अनियमितताओं को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया। स्पष्ट किया गया कि 10 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि नियमों के विरुद्ध है। साथ ही, कॉम्पोजिट फीस, सब्सक्रिप्शन फीस, बिल्डिंग फीस या कैमरा फीस जैसे नामों पर अतिरिक्त बोझ डालना उचित नहीं है। अभिभावकों से इस विषय में जागरूक रहने और विद्यालयों से पारदर्शिता बनाए रखने का आग्रह किया गया।

अंत में सभी बच्चों को नए सत्र की शुभकामनाएं देते हुए डॉ गीता खन्ना ने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल अच्छे अंक लाना नहीं, बल्कि संवेदनशील, अनुशासित और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है, जो समाज और देश के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकें।

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