हल्द्वानी(आरएनएस)। केन्द्रीय बजट आम लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान किए बिना बड़े-बड़े वादों का एक और प्रयास है। यह बात शनिवार को नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कही। प्रेस को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि बेरोजगारी और मुद्रास्फीति घरेलू आय को कम कर रही है। ग्रामीण संकट गहराता जा रहा है। बजट उन लाखों नागरिकों की आकांक्षाओं को नजरअंदाज करता है जो सार्वजनिक सेवाओं पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा बजट में ₹11,584 करोड़ की कटौती भारत के भविष्य के लिए घातक हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस बजट में बेरोजगारी और महंगाई पर ठोस समाधान की बजाय सतही दावे किए गए हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा और मनरेगा की उपेक्षा जारी है। स्मार्ट सिटी, मेडिकल कॉलेज जैसी पुरानी घोषणाओं का कोई हिसाब नहीं है। वहीं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और कृषि ऋण माफी पर सरकार की चुप्पी है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को वित्तीय अनुशासन और विकास के बीच संतुलन बनाना चाहिए था जो कि बजट में नहीं है।

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