वेतन से कटौती के बावजूद अस्पतालों में हो रही उपचार से मनाही, मंत्री ने उच्चस्तरीय बैठक का दिया आश्वासन
पौड़ी, उत्तराखंड। प्रदेश में संचालित आयुष्मान गोल्डन कार्ड योजना (स्वास्थ्य योजना) की व्यवस्था को लेकर सरकारी अधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों में गहरी नाराजगी व्याप्त है। योजना के तहत प्रतिमाह वेतन से कटौती किए जाने के बावजूद कई अस्पतालों द्वारा मरीजों को उपचार हेतु भर्ती नहीं किया जा रहा है, जिससे कार्मिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस गंभीर मुद्दे को लेकर शुक्रवार को पौड़ी प्रवास पर आए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से उत्तरांचल फेडरेशन ऑफ मिनिस्ट्रीयल सर्विसेज एसोसिएशन उत्तराखंड के पदाधिकारियों ने शिष्टाचार भेंट की और समस्या से विस्तृत रूप से अवगत कराया।
इस वार्ता के दौरान उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ जनपद पौड़ी के अध्यक्ष भारत बिष्ट भी उपस्थित रहे। संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को बताया कि वेतन से नियमित कटौती के बाद भी कर्मचारियों और उनके परिजनों को गोल्डन कार्ड के माध्यम से उपचार सुविधा नहीं मिल पा रही है, जो किसी भी स्तर पर उचित नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि इस विषय का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही उत्तरांचल फेडरेशन ऑफ मिनिस्ट्रीयल सर्विसेज एसोसिएशन उत्तराखंड, स्वास्थ्य प्राधिकरण, शासन के सचिव एवं उनकी स्वयं की उपस्थिति में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस बैठक में गोल्डन कार्ड योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, अस्पतालों द्वारा मरीजों का अनिवार्य उपचार सुनिश्चित करने तथा कार्मिकों के हितों की सुरक्षा के लिए ठोस एवं व्यावहारिक निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कर्मचारियों की इस समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा, ताकि योजना का वास्तविक लाभ उन्हें प्राप्त हो सके।
फेडरेशन के अध्यक्ष सीताराम पोखरियाल ने बताया कि कार्मिकों को आशा है कि सरकार इस गंभीर समस्या का शीघ्र समाधान करेगी। उन्होंने कहा, “वेतन से कटौती हो रही है, लेकिन सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा। यह दोहरी मार है। मंत्री जी ने सकारात्मक आश्वासन दिया है, हम इसके शीघ्र निराकरण की उम्मीद करते हैं।”
गौरतलब है कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में गोल्डन कार्ड योजना को लेकर इसी प्रकार की शिकायतें सामने आती रही हैं। मंत्री द्वारा दिया गया आश्वासन अब कर्मचारियों की उम्मीदों पर खरा उतरता है या नहीं, यह आगामी उच्चस्तरीय बैठक के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

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