देहरादून। पर्वतीय कला, लोकगायन, नृत्य शैलियों और विलुप्तप्राय परंपराओं को पुनर्जीवित करने के संकल्प के साथ बहुप्रतीक्षित ‘उत्तराखंड लोक विरासत महोत्सव–2025’ 29 और 30 नवंबर को देहरादून के सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल, हरिद्वार बाईपास रोड में आयोजित होगा। ‘उत्तराखंड लोक विरासत ट्रस्ट’ और चारधाम हॉस्पिटल द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय भव्य उत्सव में प्रदेश के सभी 13 जिलों से 150 से अधिक लोक कलाकार, वादक, हस्तशिल्पकार और युवा प्रतिभाएं अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
प्रेस क्लब देहरादून में आयोजित पत्रकार वार्ता में ट्रस्ट के अध्यक्ष और चारधाम अस्पताल के एमडी डॉ. के.पी. जोशी और सचिव सुधीर नौटियाल ने बताया कि इस वर्ष महोत्सव का पाँचवां संस्करण आपदा पीड़ितों और मृतकों को समर्पित है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, लेकिन उन्हें वह सम्मान और पहचान नहीं मिल पाती, जिसके वे हकदार हैं। यही कारण है कि संस्था हर साल पर्वतीय कलाकारों व हस्तशिल्पकारों को ट्रस्ट के खर्च पर देहरादून बुलाकर उन्हें बड़ा मंच उपलब्ध करवा रही है।
इस बार के आयोजन के सांस्कृतिक निदेशक प्रदेश के लोकप्रिय लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी, तथा जागर सम्राट पदमश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण होंगे। उनके मार्गदर्शन में लारा–लत्ता, गौना–पत्ता, थड़ियार, चौफला, झोड़ा–छोलिया समेत कई महत्वपूर्ण पारंपरिक कला-रूपों को बड़े मंच पर आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। डॉ. भरतवाण द्वारा पेश किया जाने वाला विशेष ‘ढोलनाद’ इस वर्ष का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहा है।
डॉ. जोशी ने बताया कि सत्र में प्रदेश के युवा एवं लोकप्रिय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। उन्होंने कहा कि देहरादून में लगातार चार वर्षों से उत्तराखंड लोक विरासत का सफल आयोजन हो रहा है, और इस बार इसे और भी भव्य, सुव्यवस्थित और राज्यव्यापी रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
गाँव–गाँव की परंपराएँ एक मंच पर—भाषा, खान–पान, परिधान सब पर ज़ोर
संस्था के आयोजकों के अनुसार, पूरा आयोजन इस वर्ष “अपनी जड़ों की ओर लौटो” थीम पर आधारित होगा।महोत्सव में पर्वतीय परिधानों पर विशेष फैशन शो,जौनसार-बावर, कुमाऊँ और गढ़वाल के पारंपरिक लोकगीत–वादन,लोक वाद्यों की प्रदर्शनी,ग्रामीण हस्तशिल्प, ऊन-उत्पाद, धातुकला व बांस शिल्प की बिक्री,
युवा कलाकारों एवं महिला स्वयं सहायता समूहों को मंच जैसे कार्यक्रम शामिल होंगे। आयोजकों का कहना है कि वे इस मंच के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहाड़ी भाषा, खान–पान, गहने, वेशभूषा और लोकवाद्यों की विरासत को पहुँचाना चाहते हैं। सभी प्रमुख प्रस्तुतियां पहाड़ी भाषा में होंगी और हर शाम संगीत संध्या का आयोजन रहेगा, जिसमें प्रदेश के प्रसिद्ध कलाकार जैसे नरेंद्र सिंह नेगी, प्रीतम भर्तवान, संगीता ढोंडियाल, मीना राय, रजनीकांत आदि अपनी प्रस्तुति देंगे।
आयोजको के अनुसार, महोत्सव में “लोक विरासत ट्रस्ट ” भी सहयोगी संस्था के रूप में शामिल रहेगा। यह समूह वर्षों से दूरस्थ गांवों में हेल्थ कैंप,पहाड़ी परिवारों को आर्थिक सहयोग,आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य,गरीब बच्चों को शिक्षा–सहायता,ग्रामीण आजीविका सुधार और चारधाम अस्पताल में पहाड़ से आए गरीब लोगों को सस्ती दर पर चिकित्सा सुविधा प्रदान करना जैसे सराहनीय कार्य करता आ रहा है। महोत्सव में इनके योगदान को भी विशेष मंच पर रेखांकित किया जाएगा।
चार खंडों में विभाजित होगा कार्यक्रम
महोत्सव का पूरा ढांचा चार प्रमुख खंडों—लोक रंग, लारा लत्ता /गौना–पत्ता, गीत संध्या और हस्तशिल्प प्रदर्शनी—में बांटा गया है।
हर सत्र में जिलेवार टीमों की प्रस्तुति होगी, जिनमें पहाड़ के दुर्लभ गीत–नृत्य, वाद्य-धुनें और पारंपरिक कथाएँ शामिल रहेंगी।
उद्देश्य—पर्वतीय संस्कृति का संरक्षण और नई पीढ़ी में जागरूकता
डॉ. जोशी ने कहा कि उत्तराखंड का सांस्कृतिक वैभव वैश्विक पहचान की क्षमता रखता है। मगर पर्वतीय क्षेत्रों में तेजी से हो रहे सामाजिक बदलाव, पलायन और आर्थिक चुनौतियों ने इन लोककलाओं को संकट में डाल दिया है। महोत्सव का उद्देश्य कलाकारों को सम्मान, मंच और आजीविका दोनों उपलब्ध कराना है, ताकि यह धरोहर केवल इतिहास का हिस्सा न बन जाए, बल्कि नई पीढ़ी तक जीवंत रूप में पहुँचे।

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