देहरादून। जिला प्रशासन का आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर (ICC) बालश्रम और भिक्षावृत्ति के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान में एक संजीवनी बनकर उभरा है। यह केंद्र उन बच्चों के लिए एक नया रास्ता दिखा रहा है, जिनका बचपन कठिन परिस्थितियों में बीत रहा था।
सहस्त्रधारा रोड पर निरीक्षण के दौरान, प्रशासन की टीम ने दो नाबालिग लड़कियों को एक दुकान में काम करते हुए पाया। उनके रेस्क्यू के बाद, जिला प्रशासन ने उनकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति को समझने के लिए काउंसलिंग की और उनके माता-पिता को भी बालश्रम के दुष्परिणामों एवं शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया।
इन दोनों बेटियों को इंटेंसिव केयर सेंटर में नामांकित किया गया और उनके शिक्षा के सफर की शुरुआत साधुराम इंटर कॉलेज से की गई। उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सामग्री, जैसे किताबें, बैग और जूते भी प्रदान किए गए। यह कदम न केवल उनके वर्तमान को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि उनके भविष्य को भी सशक्त बना रहा है।
जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर, जनपद में बालश्रम एवं भिक्षावृत्ति के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। रेस्क्यू कर लिए गए प्रत्येक बच्चे के समग्र पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। इंटेंसिव केयर सेंटर के माध्यम से बच्चों को योग, संगीत और खेल जैसी गतिविधियों से एक सुरक्षित माहौल प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बन सकें।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि बालश्रम और भिक्षावृत्ति में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जबकि रेस्क्यू किए गए बच्चों को हर संभव सहायता देकर उनका भविष्य संवारा जाएगा।
यह पहल न केवल एक प्रेरणादायक कहानी है, बल्कि यह यह दर्शाता है कि जिला प्रशासन समाज में परिवर्तन लाने के लिए कैसे प्रतिबद्ध है। हर बच्चे को शिक्षा और सुरक्षा का अधिकार है, और जिला प्रशासन इस दिशा में दृढ़ संकल्पित है।

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