ग्राफिक एरा में शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया को लैंगिक रूप से संवेदनशील और समावेशी बनाने पर जोर दिया गया।
देहरादून। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को भिन्न लैंगिक पहचान के लोगों के प्रति सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करने पर जागरूकता के लिए एफडीपी का आयोजन किया गया। एफडीपी के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए प्रो चांसलर डॉ राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि महिलाओं की भूमिकाएँ अत्यंत विविध हैं, और इसे केवल 50-50 समानता के रूप में सीमित करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक लैंगिक रूप से संवेदनशील और समावेशी वातावरण बनाना हर संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यह न केवल छात्रों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और सहज माहौल सुनिश्चित करता है, बल्कि उनके व्यक्तिगत और पेशेवर विकास को भी सर्वोच्च स्तर तक प्रोत्साहित करता है।
इस पांच दिवसीय एफडीपी में देशभर की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने ऑनलाइन तथा ऑफलाइन माध्यम से अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान चर्चाएं, कार्यशालाएं और राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित की गईं, जिनमें शिक्षण प्रणाली में लैंगिक संवेदनशीलता को प्रभावी रूप से शामिल करने के व्यावहारिक और नीतिगत पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस एफडीपी का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर और बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में प्रो वाइस चांसलर डॉ संतोष एस सर्राफ, रजिस्ट्रार डॉ. नरेश कुमार शर्मा, बायोटेक्नोलॉजी के विभागाध्यक्ष प्रो. रूपंक नागरिक, डॉ. भारती शर्मा, शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र- छात्राएं शामिल रहे।

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