​जॉर्ज एवरेस्ट मार्ग पर आर-पार: मीरा सकलानी का सख्त रुख, 10 दिन का अल्टीमेटम

10 दिन में समाधान नहीं तो आंदोलन!

मसूरी: नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने जॉर्ज एवरेस्ट परिसर तक जाने वाले मार्ग को लेकर उठ रहे विवाद में हस्तक्षेप करते हुए संबंधित कंपनी प्रबंधन को स्पष्ट 10 दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आम जनता के उस सार्वजनिक रास्ते को नहीं खोला गया या शुल्क वसूली जारी रही, तो प्रशासनिक स्तर पर पूरे मार्ग को बंद करने सहित कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यह घोषणा एक घटनापूर्ण स्थल निरीक्षण के बाद आई, जब शनिवार को पालिका अध्यक्ष अपने अधिकारियों और ‘जॉर्ज एवरेस्ट संघर्ष समिति’ के सदस्यों के साथ मौके पर पहुंचीं। निजी सुरक्षा गार्डों ने प्रारंभ में अध्यक्ष सहित अधिकारियों और मीडिया को प्रवेश रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद मीडिया कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार के आरोप में तनाव फैल गया। अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद ही निरीक्षण दल को अंदर जाने दिया गया।

निरीक्षण के बाद पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विवादित मार्ग ऐतिहासिक रूप से एक सार्वजनिक रास्ता रहा है, जिस पर आमजन और पर्यटकों का पूरा अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा, “इसे निजी बताकर किसी को रोकना या शुल्क लेना कानूनन गलत है। मसूरी में न तो स्थानीय लोगों का शोषण होने दिया जाएगा और न ही पर्यटकों से जबरन उगाही बर्दाश्त की जाएगी।”

सकलानी ने बताया कि नगर पालिका इस मामले में कंपनी प्रबंधन और पर्यटन विभाग से सभी दस्तावेजों के आधार पर वार्ता करेगी। साथ ही, उच्च न्यायालय के पूर्व के निर्देशों का गहन अध्ययन किया जा रहा है ताकि सार्वजनिक और निजी रास्तों के दायरे को स्पष्ट किया जा सके। उन्होंने दावा किया कि पर्यटन विभाग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि भूमि हस्तांतरण के दौरान कंपनी को कोई आम रास्ता नहीं दिया गया था, और सार्वजनिक मार्गों की मालिक नगर पालिका ही है।

‘जॉर्ज एवरेस्ट संघर्ष समिति’ के सदस्य भगत सिंह कठैत ने कंपनी पर हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि 10 दिन में रास्ता नहीं खोला गया तो उग्र आंदोलन और अदालत में अवमानना याचिका दायर की जाएगी।

वहीं, कांग्रेस नेता डॉ. सोनिया आनंद रावत ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने बाबा रामदेव के सहयोगी की कंपनी को नियमों को दरकिनार कर जमीन लीज पर दी है और कंपनी अवैध शुल्क वसूल रही है। उन्होंने भी आंदोलन की धमकी दी।

यह विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। नगर पालिका का अल्टीमेटम और विरोध की चेतावनियां आने वाले दिनों में प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के बीच एक बड़े टकराव की आशंका पैदा कर रही हैं। मसूरी के इस प्रमुख पर्यटन स्थल तक पहुंच को लेकर स्थानीय हित, पर्यटकों के अधिकार और निजी प्रबंधन के दावों के बीच का यह संघर्ष जल्द ही निर्णायक दौर में प्रवेश करने वाला है।

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