ग्राफिक एरा में वेस्ट मैनेजमेंट पर वैश्विक संवाद

देहरादून । ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में पर्यावरण संरक्षण, वेस्ट मैनेजमेंट, सर्कुलर इकॉनमी और हरित विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन किया गया। विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों ने इन विषयों पर अपने विचार, अनुभव और शोध साझा किए।
इस तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति डा. नरपिंदर सिंह ने कहा कि सतत् विकास तभी साकार हो सकता है जब विज्ञान, समाज और नीतियां एक समन्वित दिशा में मिलकर कार्य करें और सामूहिक रूप से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि वेस्ट मैनेजमेंट आज केवल एक तकनीकी या नीतिगत विषय नहीं रहा, बल्कि यह मानवता के अस्तित्व, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और पृथ्वी के संतुलन से जुड़ा एक वैश्विक दायित्व बन चुका है।
इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ वेस्ट मैनेजमेंट, एयर एंड वॉटर के अध्यक्ष डा. साधन कुमार घोष ने कहा कि इस सम्मेलन ने दुनिया के विभिन्न देशों के विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर जोड़कर नए विचारों का आदान-प्रदान किया है। डा. घोष ने सर्कुलर इकॉनमी, रीसाइक्लिंग और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को सतत् विकास का मूल आधार बताते हुए कहा कि अपशिष्ट को भार नहीं, बल्कि एक संसाधन के रूप में देखने की सोच विकसित करनी होगी।
इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में 40 से अधिक देशों के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से भाग लिया। सम्मेलन में लगभग 30 तकनीकी सत्रों में 291 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए और 290 शोध-सार (एब्स्ट्रैक्ट) प्रदर्शित किए गए, जिनमें पर्यावरण संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, सर्कुलर इकॉनमी और सतत् विकास जैसे विषयों पर नवीन शोध और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए गए।
इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी और अंतर्राष्ट्रीय अपशिष्ट प्रबंधन वायु और जल समिति ने संयक्त रूप से किया। सम्मेलन में से. नि. आईएएस श्री उपेंद्र त्रिपाठी, एनवायरनमेंट साइंस डिपार्टमेंट की हेड प्रो. (डा.) प्रतिभा नैथानी, डा. रचन कर्माकर समेत अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं छात्र-छात्राएं शामिल रहे।

ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में आयोजित यह सम्मेलन इस बात का सशक्त प्रमाण बना कि यदि विज्ञान, नीति और समाज एकजुट हों तो पर्यावरण संकट का समाधान संभव है। वेस्ट मैनेजमेंट अब केवल प्रयोगशाला का विषय नहीं, बल्कि यह मानवता के भविष्य से जुड़ी वैश्विक जिम्मेदारी बन चुका है।

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