गोदियाल ने उपनल कर्मियों के धरने को दिया समर्थन, सरकार पर साधा निशाना

देहरादून। प्रदेश में उपनल कर्मचारियों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। अपनी न्यायोचित मांगों के समर्थन में पिछले 10 दिनों यह धरना जारी है। कर्मचारियों की इसी पीड़ा और संघर्ष के बीच आज एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्तक्षेप देखने को मिला, जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल स्वयं धरना स्थल पर पहुँचे और आंदोलनरत कर्मचारियों से मुलाकात की।

धरने पर बैठे कर्मचारियों का हाल-चाल लेने के बाद गोदियाल ने उनकी लड़ाई को कांग्रेस का खुला और स्पष्ट समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि उपनल कर्मचारी राज्य की व्यवस्था की रीढ़ हैं, जिनकी आवाज़ को वर्षों से लगातार अनसुना किया गया है। “दस दिनों से खुले आसमान के नीचे बैठे कर्मचारी सरकार की कठोरता और तानाशाही रवैये का ज़िंदा प्रमाण हैं। उनकी मांगें न तो अत्यधिक हैं और न ही राजनीतिक, बल्कि पूरी तरह मानवाधिकारों और न्याय पर आधारित हैं,” गोदियाल ने कहा।

कांग्रेस अध्यक्ष ने आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए दो-टूक शब्दों में कहा

“कांग्रेस उपनल कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। जब तक न्याय नहीं मिलता, हमारा संघर्ष थमेगा नहीं।”

उन्होंने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य की धामी सरकार न केवल कर्मचारी हितों की अनदेखी कर रही है, बल्कि रोजगार व्यवस्था और संविदा प्रणाली में सुधार को लेकर “जानबूझकर मौन” है। जबकि उपनल कर्मियों की मांगें—न्यूनतम वेतन, सेवा सुरक्षा, समान कार्य–समान वेतन—पूरी तरह कानूनी, तार्किक और मानवीय आधार वाली हैं।

इस मौके पर गोदियाल ने कांग्रेस की ओर से तीन प्रमुख माँगों को स्पष्ट रूप से रखा।

  1. सरकार तुरंत उपनल कर्मचारियों से वार्ता शुरू करे।
  2. सभी मांगों पर समयबद्ध समाधान प्रस्तुत किया जाए।
  3. कर्मचारियों के रोजगार और जीवन सुरक्षा को लेकर पारदर्शी नीति लागू की जाए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रुख साफ है—समाधान सम्मानजनक होना चाहिए, और तब तक पार्टी हर स्तर पर उपनल कर्मचारियों के साथ खड़ी रहेगी। गोदियाल ने यह भी कहा कि यदि धामी सरकार उपनल कर्मियों की समस्याओं का उचित निस्तारण करती है, तो वे स्वयं कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकार का अभिनंदन करेंगे।

धरना स्थल पर कांग्रेस के इस मजबूत समर्थन ने आंदोलनरत कर्मचारियों में नया उत्साह भर दिया है। अब नज़रें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या सरकार वार्ता के लिए आगे आएगी या कर्मचारियों का संघर्ष और लंबा खिंचेगा।

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