ईश्वर की कृपा: दूसरों की सेवा में निहित

प्रभु की कृपा और स्नेह को अनुभव करने का सबसे सीधा रास्ता परोपकार के मार्ग से होकर जाता है। अक्सर हमारे धार्मिक ग्रंथ हमें यही सिखाते हैं कि अपनी भलाई से पहले दूसरों की भलाई के लिए स्वयं को समर्पित करना ही सबसे बड़ा धर्म है। सभी धर्मों में ऐसी अनेक कहानियाँ और कविताएँ मिलती हैं जो यह बताती हैं कि ईश्वर की दृष्टि उस इंसान पर हमेशा रहती है, जिसने किसी असहाय की मदद की हो। कोई व्यक्ति संत या महात्मा हो या न हो, यदि वह अपने अच्छे कामों से दूसरों को राहत पहुँचाता है, तो ईश्वर की नज़रों में उसका मान-सम्मान बढ़ जाता है।
यह सत्य है कि सभी धर्मों की शिक्षा दूसरों के कल्याण के लिए त्याग करने की प्रेरणा देती है। इंसान को दूसरों से प्रेम करने और उनकी सहायता करने के लिए ही बनाया गया है। हमें बिना किसी संकोच के दूसरों के दुःख-दर्द में सहभागी बनना चाहिए।
हमने उन लोगों के जीवन से प्रेरणा ली है जिन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली। हम उन वीरों को भी सम्मान देते हैं जिन्होंने अपने देश की रक्षा में प्राणों का बलिदान दिया। मानवता की सेवा करते हुए अपनी जान गँवाने वालों को हम शहीद का दर्जा देते हैं। संतों-महापुरुषों के अनुसार, सेवा हमारे जीवन का एक परम उद्देश्य है। हालांकि, यह ज़रूरी नहीं कि हर आम इंसान को किसी की जान बचाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान देना पड़े। हमारे रोज़मर्रा के जीवन में भी ऐसे अनेक अवसर आते हैं जब हम अपने समय, धन, योग्यता या प्रतिभा का उपयोग करके किसी की सहायता कर सकते हैं।
सच्ची और निस्वार्थ सेवा केवल परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें पूरी मानवता की सेवा शामिल है। सबके प्रति प्रेम और सहायता का भाव रखना एक नेक इंसान के सबसे बड़े गुण हैं। सूफी-संतों का मानना है कि ईश्वर ने इंसान को दूसरों से प्रेम और उनकी मदद करने के लिए ही बनाया है। यदि उसे केवल भक्ति चाहिए होती, तो उसके पास पहले से ही देवी-देवता मौजूद थे। इस दुनिया में सिर्फ इंसान ही वह प्राणी है जिसे दूसरों से प्रेम करने और सहायता करने का ईश्वरीय गुण, ‘सहानुभूति’ प्राप्त है।
हमें यह समझने का प्रयास करना चाहिए कि जब दूसरे केवल अपने बारे में सोच रहे हों, तब भी हमें अपना दिल खोलकर दूसरों के कष्टों में शामिल होना चाहिए। जब किसी प्राकृतिक आपदा के कारण लोग बेघर हो जाते हैं और उनके पास भोजन, कपड़े या दवाइयाँ भी नहीं बचतीं, तो ऐसे समय में हम उनकी मदद कर सकते हैं। जब हम किसी की सहायता करते हैं, तो हमारा हृदय विशाल होता है और हमें एक अनोखी शांति, खुशी और आनंद का अनुभव होता है।
दुनिया में ऐसे कई महान लोग हुए हैं जिन्होंने दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। वैज्ञानिकों ने लोगों के जीवन को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए कई आविष्कार किए। डॉक्टरों ने अनगिनत बीमारियों का इलाज खोजने के लिए अथक प्रयास किए। कुछ अन्य लोगों ने दूसरों की स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी जान भी दे दी। इसी तरह, कई संतों-महापुरुषों ने दूसरों की आत्मिक उन्नति के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
आइए, हम भी इन महान व्यक्तियों की तरह इस संसार में लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में अपना योगदान दें। हमें अपनी क्षमता, ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग दूसरों के कल्याण के लिए करना चाहिए, क्योंकि तभी हम सही मायने में एक सार्थक जीवन जी रहे होते हैं।

(संत राजिन्दर सिंह जी महाराज के लेख से )
सावम कृपाल रुहानी मिशन, जिसे भारत के बाहर साइंस आफ़ स्पिरिच्युएलिटी के नाम से भी जाना जाता है, के अध्यक्ष संत राजिन्दर जी महाराज धर्म और विज्ञान, दोनों के ही बड़े जानकार हैं। संत कृपाल सिंह जी महाराज और संत दर्शन सिंह जी महाराज, इनके आध्यात्मिक गुरु रहे हैं।

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