
देहरादून, 2 जुलाई 2026: उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने और लंबे समय से लटके प्रमोशन के मामलों को सुलझाने के लिए धामी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण और वरिष्ठता का मामला वर्तमान में उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण विभागीय स्तर पर निर्णय नहीं लिया जा पा रहा था। इस कानूनी अड़चन से पार पाने के लिए अब स्थानांतरण एक्ट से छूट और समयवृद्धि का प्रस्ताव कार्मिक विभाग को भेजा जाएगा, ताकि पर्याप्त छात्र संख्या वाले स्कूलों में रिक्त पदों को धारा-27 और अनुरोध श्रेणियों के आधार पर भरा जा सके। महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को जल्द ही यह प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही, माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत शिक्षकों की वरिष्ठता और पदोन्नति के विवाद को लेकर भी सरकार ने रुख साफ कर दिया है। शिक्षक संगठनों की लगातार बढ़ रही मांग और कोर्ट के निर्णय में संभावित देरी को देखते हुए सरकार ने अंतिम विकल्प के रूप में ‘अध्यादेश’ लाने का रास्ता खुला रखा है। शिक्षा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को अध्यादेश का प्रस्ताव भी तैयार रखने को कहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर इसके जरिए वरिष्ठता का निर्धारण कर शिक्षकों को पदोन्नति दी जा सके। इस संबंध में शासन स्तर पर न्याय, कार्मिक एवं वित्त विभाग के साथ सहमति बन चुकी है।
बैठक में स्कूलों के बुनियादी ढांचे को सुधारने पर भी विशेष जोर दिया गया। शिक्षा मंत्री ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों से तीन दिन के भीतर जर्जर स्कूलों के प्रस्ताव मांगे हैं ताकि उनके बजट को मंजूरी दी जा सके। इसके अलावा, प्रदेश के सभी विद्यालयों में शत-प्रतिशत शौचालय निर्माण, पेयजल, बिजली आपूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, शिक्षकों के त्रिस्तरीय ढांचे, एससीईआरटी व डायट की नई नियमावली, अशासकीय विद्यालयों के प्रांतीयकरण और तदर्थ सेवाओं को जोड़ने की प्रक्रिया में भी तेजी लाने को कहा गया है। बैठक में मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन सहित शिक्षा, न्याय, कार्मिक और वित्त विभाग के तमाम उच्चाधिकारी मौजूद रहे।

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