ग्राफिक एरा में आईओएस डेवलपमेंट व एआई—हाई परफॉर्मिंग कंप्यूटिंग सेंटर का भव्य उद्घाटन

मानव बुद्धि के साथ एआई का संतुलित समन्वय अनिवार्य : केंद्रीय विज्ञान राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

देहरादून।  देहरादून स्थित ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आज तकनीकी शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया जब केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने विश्वविद्यालय के अत्याधुनिक आईओएस डेवलपमेंट सेंटर तथा एनवीडिया सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड हाई परफॉर्मिंग कंप्यूटिंग का उद्घाटन किया। एप्पल और इंफोसिस के तकनीकी सहयोग तथा एनवीडिया की हाई-कैपेसिटी सर्वर क्षमताओं से सुसज्जित यह केंद्र स्किल डेवलपमेंट, रिसर्च और इंडस्ट्री–अकादमी साझेदारी के लिए एक समर्पित हब के रूप में स्थापित किया गया है। इस विशेष केंद्र का निर्माण लगभग बीस करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।

उद्घाटन के समय केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का प्रवेश समारोह स्थल पर विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. कमल घनशाला और वाइस चेयरपर्सन राखी घनशाला ने भव्य स्वागत किया। समारोह में राज्य के चिकित्सा, स्वास्थ्य व शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, नीति आयोग के सदस्य व विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. वी. के. सारस्वत, कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह, प्रो-वीसी डॉ. संतोष एस. सर्राफ, कुलसचिव डॉ. नरेश कुमार शर्मा, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अमित आर. भट्ट तथा अन्य अधिकारी, शिक्षक व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने सम्बोधन में एआई को एक औजार बताते हुए कहा कि आने वाली औद्योगिक क्रांति का केंद्र एआई होगा और इसकी दीर्घकालीन सफलता के लिए मानव बुद्धि के साथ उसका संतुलित समन्वय अनिवार्य है। उन्होंने स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग व निर्माण जैसे क्षेत्रों में एआई के अनुप्रयोगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में एआई मरीज से उसकी स्थानीय भाषा में संवाद कर उपचार को सुलभ बना सकता है। उन्होंने ग्राफिक एरा के इस सेंटर को प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया अभियानों की भावना का साकार रूप बताया और सलाह दी कि ऐसे प्रोजेक्ट्स को स्टार्टअप व इंडस्ट्री से जोड़कर बड़े पैमाने पर लाभ पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने समारोह के दौरान विद्यार्थियों व विशेषज्ञों से लंबी बातचीत भी की।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. सारस्वत ने कहा कि एआई अब केवल ऑटोमेशन नहीं बल्कि ‘ऑग्मोनेशन’ की ओर ले जा रहा है — यानी एआई इंसान की कार्यक्षमता और सोच को बढ़ाकर उसे एक बेहतर समस्या-निवारक बना रहा है। डॉ. सारस्वत ने आगे बताया कि वर्ष 2030 तक व्यापक स्तर पर रिस्किलिंग की आवश्यकता है और उद्योगों में हार्ड स्किल्स के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स की भी अहमियत बढ़ जाती है — जो केवल मानव संसाधन ही दे सकता है। उन्होंने एआई के जिम्मेदार उपयोग तथा मानवीय मूल्यों के साथ उसके समावेश पर ज़ोर दिया।

ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. कमल घनशाला ने केंद्र की क्षमताओं का विस्तृत परिचय देते हुए बताया कि एनवीडिया के उन्नत सर्वर और एप्पल-इंफोसिस के सहयोग से स्थापित आईओएस डेवलपमेंट यूनिट से रियल-टाइम ऐप डेवलपमेंट, हाई-एंड रिसर्च और उद्योग-स्तर के प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में मदद मिलेगी। डॉ. कमल ने बताया कि यह केंद्र स्टूडेंट्स, रिसर्चर्स और वैज्ञानिकों को वैश्विक मानकों की तकनीकी सुविधाएँ और प्रशिक्षण देगा।

समारोह में विशेष रूप से यह बात उभरी कि ऐसे संस्थागत प्रयास केवल तकनीक तक सीमित नहीं रहते — वे स्थानीय युवाओं को वैश्विक बाजार के लिए सक्षम बनाते हैं, रोजगार के अवसरों के दरवाजे खोलते हैं और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा को नए मानक देते हैं। राज्य शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने ग्राफिक एरा को देश के शीर्ष 50 विश्वविद्यालयों में स्थान मिलने (48वीं रैंक) पर प्रसन्नता व्यक्त की और संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. कमल घनशाला को ग्लोबल लीडर के रूप में सम्मानित करते हुए उनके योगदान की सराहना की।

उद्घाटन के पश्चात आयोजित संवाद में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों व उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि केंद्र विश्वविद्यालय-उद्योग सहयोग को मजबूत करेगा, स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देगा और स्थानीय भाषा व सांस्कृतिक संदर्भों में एआई के अनुप्रयोग विकसित करने में मदद करेगा — जो ग्रामीण व बहुभाषी देश के लिए अत्यंत आवश्यक है।

कमल घनशाला — यंग जनरेशन के प्रेरक नेता
समारोह के दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री ने डॉ. कमल घनशाला को ‘यंग जनरेशन का रोल मॉडल’ करार दिया। डॉ. सिंह ने कहा कि डॉ. घनशाला ने अपना संस्थान केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक उत्थान के लिए स्थापित किया है और उनका विजन केवल उत्तराखंड तक सीमित न रहकर पूरे देश में फैलना चाहिए।

समारोह ने यह सन्देश स्पष्ट किया कि शिक्षा, तकनीक और नीति के संयोग से जो केन्द्र स्थापित किए जाते हैं, वे युवाओं के लिए न सिर्फ़ कौशल सिखाने का माध्यम हैं बल्कि उन्हें वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए आत्मविश्वास भी प्रदान करते हैं। ग्राफिक एरा का यह कदम न केवल क्षेत्रीय शिक्षा परख को समृद्ध करेगा बल्कि भारत की तकनीकी क्षमताओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में भी निर्णायक भूमिका निभायेगा।

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