हरिद्वार। हरिद्वार बस अड्डे और रेलवे स्टेशन परिसर में हुए एक सनसनीखेज हमले के आरोपी को जीआरपी हरिद्वार पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। तमिलनाडु निवासी बाबा शिव कुमार ने शराब पिलाने से इनकार करने पर नेपाल के यात्री पर चाकू से हमला किया था। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था और तमिलनाडु भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जीआरपी की सतर्कता और तेज़ कार्रवाई ने उसे दबोच लिया।
घटना का विवरण
12 सितंबर की सुबह करीब 9:30 बजे हरिद्वार बस अड्डे पर तमिलनाडु से आए बाबा शिव कुमार ने नेपाल के यात्री भीमा पुत्र महावीर से शराब पीने की मांग की। भीमा द्वारा मना करने पर बाबा ने चाकू से हमला कर दिया, जिससे भीमा के हाथ में चोट आई। बचाव में भीमा ने बाबा को पास पड़े पत्थर से चोट पहुंचाई और रेलवे स्टेशन की ओर भाग गया।
बाबा ने पीछा करते हुए रेलवे स्टेशन परिसर में टिकट घर के पास सीढ़ियों पर भीमा के पेट में चाकू से गहरा वार किया। आसपास मौजूद लोगों ने बीच-बचाव किया, लेकिन बाबा मौके से फरार हो गया। घायल भीमा को तत्काल जीआरपी द्वारा जीडी हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां उसकी जान बचाई गई। डॉक्टरों ने बताया कि अब उसकी हालत खतरे से बाहर है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए जीआरपी हरिद्वार ने तीन टीमें गठित कीं। सब इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने रेलवे स्टेशन परिसर में सघन तलाशी अभियान चलाया और आरोपी को तमिलनाडु भागने से पहले ही पकड़ लिया। पूछताछ में बाबा ने बताया कि वह तीन दिन पहले ही हरिद्वार आया था और घटना के बाद भागने की योजना बना रहा था।
भीमा की तहरीर पर जीआरपी हरिद्वार में मुकदमा संख्या 89/25, धारा 109(1), 352 BNS के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपी को न्यायालय के आदेश पर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब उसके आपराधिक इतिहास की जांच कर रही है।
नेतृत्व और सराहना
इस पूरे अभियान में कप्तान तृप्ति भट्ट के नेतृत्व और एएसपी अरुणा भारती व सीओ स्वप्निल मुयाल के निकट पर्यवेक्षण की अहम भूमिका रही। कप्तान भट्ट के निर्णय और समर्पण ने एक बार फिर साबित किया कि संकट की घड़ी में उनका नेतृत्व कितना प्रभावशाली होता है। पुलिस टीम में सब इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार, हेड कांस्टेबल पृथ्वी नेगी और कांस्टेबल जाहुल मिर्ज़ा शामिल रहे।
जनता की प्रतिक्रिया
घटना के बाद आरोपी की त्वरित गिरफ्तारी से स्थानीय जनता ने राहत की सांस ली और जीआरपी हरिद्वार की सराहना की। आम नागरिकों ने पुलिस की तत्परता और साहसिक कार्रवाई को सराहा, जिससे शहर में सुरक्षा की भावना और मजबूत हुई है।
हरिद्वार जीआरपी की यह सफलता न केवल एक अपराधी को पकड़ने की कहानी है, बल्कि यह उस प्रतिबद्धता की मिसाल है जो उत्तराखंड पुलिस आमजन की सुरक्षा के लिए दिन-रात निभा रही है।

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