हरियाणा कैडर के एडीजीपी वाई पूर्ण कुमार ने की आत्महत्या, चंडीगढ़ में सरकारी आवास पर खुद को मारी गोली

चंडीगढ़: हरियाणा कैडर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) वाई पूरन कुमार ने मंगलवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित अपने सरकारी आवास में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही चंडीगढ़ पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।

जानकारी के अनुसार, घटना के समय वाई पूरन कुमार की पत्नी, आईएएस अधिकारी अमनीत पी कुमार, घर पर मौजूद नहीं थीं। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है। इस घटना ने पुलिस महकमे और प्रशासनिक हलकों में शोक की लहर दौड़ा दी है।

अधिकारियों ने बताया कि फॉरेंसिक टीम मौके से साक्ष्य जुटा रही है। प्रारंभिक जांच में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है ताकि इस दुखद घटना के पीछे के कारणों का पता लगाया जा सके।

वरिष्ठ स्तर के होते हैं अधिकारी

भारत में पुलिस विभाग में आईपीएस अधिकारियों की तनख्वाह उनके पद, अनुभव और जिम्मेदारी के हिसाब से तय की जाती है. इनमें अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) का पद एक वरिष्ठ स्तर का होता है, जो राज्य पुलिस सेवा के शीर्ष पदों में गिना जाता है. यह पद न केवल अधिकार और प्रतिष्ठा से जुड़ा होता है बल्कि इसके साथ आकर्षक वेतन और सुविधाएं भी मिलती हैं.

कितना होता है मूल वेतन

सरकारी वेतनमान के अनुसार, एक अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक का मूल वेतन लगभग 2,05,400 रुपये प्रति माह होता है. कुछ मामलों में यह आंकड़ा 2,05,000 से 2,05,400 के बीच भी होता है, जो उनकी सेवा अवधि और वेतन स्तर के आधार पर तय किया जाता है. यह वेतन सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत निर्धारित है.

भत्ते और सुविधाएं

मूल वेतन के अलावा, ADG रैंक के अधिकारी को कई तरह के सरकारी भत्ते और लाभ मिलते हैं. इनमें प्रमुख हैं, महंगाई भत्ता महंगाई दर के हिसाब से समय-समय पर बढ़ाया जाता है. मकान किराया भत्ता अधिकारी के तैनाती क्षेत्र पर निर्भर करता है और उनके आवास खर्च में सहायता करता है. यात्रा और वाहन भत्ता आधिकारिक कार्यों के लिए यात्रा करने या सरकारी वाहन की सुविधा देना. अधिकारियों को सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य योजनाओं के तहत चिकित्सा सुविधा भी दी जाती है.

सभी भत्तों और लाभों को जोड़ने पर एक अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक का मासिक वेतन 2.5 लाख से 3 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. यह राशि राज्य के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है, क्योंकि कुछ राज्यों में अतिरिक्त सुविधाएं या स्पेशल अलाउंस भी दिए जाते हैं.

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