नौ पर्वतीय जिलों में तैनात किए 84 बॉण्डधारी चिकित्सक
अस्पतालों में डॉक्टरों के आने से मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
देहरादून, 28 मार्च 2025(हमारी चौपाल ) उत्तराखंड के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, डॉ. धन सिंह रावत ने आज घोषणा की कि राज्य सरकार ने 84 नए एमबीबीएस चिकित्सकों की तैनाती की है, जो राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से पास आउट हुए हैं। इन चिकित्सकों को प्रदेश के नौ पर्वतीय जनपदों में तैनात किया गया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार एवं मरीजों को उपचार में सहायता मिलेगी।
डॉ. रावत ने बताया कि इन बॉण्डधारी चिकित्सकों की तैनाती के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के अपग्रेडेशन के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। उन्होंने उल्लेख किया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों तथा अन्य पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती के परिणामस्वरूप चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर सुधार हो रहा है।
तैनाती विवरण:
चिकित्सकों की तैनाती निम्नलिखित जिले में की जा रही है:
- पौड़ी और अल्मोड़ा: 15 चिकित्सक
- पिथौरागढ़: 11 चिकित्सक
- बागेश्वर: 6 चिकित्सक
- चमोली: 9 चिकित्सक
- रुद्रप्रयाग: 9 चिकित्सक
- उत्तरकाशी: 7 चिकित्सक
- टिहरी: 7 चिकित्सक
- चम्पावत: 5 चिकित्सक
चिकित्सकों की तैनाती स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर से मुख्य चिकित्साधिकारियों को दी गई सूची के आधार पर प्राथमिकता के अनुसार की जाएगी। सभी बॉण्डधारी चिकित्सकों को 20 दिन के भीतर अपने तैनाती स्थान पर योगदान देने और स्थानीय सीएमओ को योगदान आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
महत्वपूर्ण निर्देश:
डॉ. रावत ने बताया कि संविदा बॉण्डधारी चिकित्सकों की नियुक्ति बॉण्ड व्यवस्था के तहत 5 वर्षों के लिए की गई है और उनके मानदेय की व्यवस्था की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई चिकित्सक बॉण्ड के नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ अनुबंध की शर्तों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं का सुधार:
मंत्री ने आशा जताई कि पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सकों की तैनाती से वहां की स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर होंगी, जिससे स्थानीय लोगों को चिकित्सा उपचार उपलब्ध हो सकेगा। यह कदम क्षेत्र के दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
इस प्रकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से उठाए गए इस कदम से न केवल स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ होंगी, बल्कि पर्वतीय जनपदों में मरीजों को बेहतर उपचार और देखभाल मिल सकेगी।

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