देहरादून। यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) के देहरादून कैंपस में मंगलवार से तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन ‘हिमालय कॉलिंग 2025’ का भव्य शुभारंभ हुआ। हिमालयन इंस्टीट्यूट फॉर लर्निंग एंड लीडरशिप (HILL) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का थीम “हिमालय के साथ उठो और एसडीजी की गति बढ़ाओ” रखा गया है।
इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने कहा, “हिमालय कॉलिंग हमारे महान हिमालय की रक्षा के लिए एक सामूहिक प्रतिबद्धता है। यह सम्मेलन ज्ञान और कर्म का संगम स्थल बन गया है जो समुदायों, वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और छात्रों को एकजुट करता है।”

सम्मेलन की खास बात यह है कि इसमें 10 पद्म पुरस्कार विजेताओं सहित 128 विशेषज्ञ वक्ता शामिल हो रहे हैं। पद्म विजेताों में पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, इम्यूनोलॉजिस्ट प्रो. जी.पी. तलववार, और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. कल्याण सिंह रावत प्रमुख हैं।
यूपीईएस के कुलपति डॉ. राम शर्मा ने बताया, “इस वर्ष 700 से अधिक छात्र और 1,600 से ज्यादा प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम में 17 ऑफलाइन और 9 ऑनलाइन सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।”
सम्मेलन के पहले दिन ईएसजी, पर्वतीय आजीविका और खाद्य सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हुई। दूसरे दिन नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों में मानवाधिकार, जलवायु मॉडलिंग और अक्षय ऊर्जा जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा।

HILL के निदेशक डॉ. जे.के. पांडेय ने कहा, “इस वर्ष हमारा फोकस समाधान-प्रधान है। हम चाहते हैं कि युवा हिमालय को किसी समस्या की तरह नहीं बल्कि एक साथी की तरह देखें।”
सम्मेलन के साथ ही हिमालयी उत्पादों की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जिसमें 400 से अधिक हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं। यह प्रदर्शनी 11 सितंबर तक सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी।

तीसरे और अंतिम दिन समापन सत्र में डॉ. नितिन सेठ, डॉ. दुर्गेश पंत और श्रीमती मीनाक्षी सुंदरम जैसे विशेषज्ञ मुख्य वक्ता होंगे। इस दौरान हिमालय क्षेत्र के सतत विकास के लिए एक सामूहिक रणनीति पत्र भी जारी किया जाएगा।

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