राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. पी. सिंह रावत के नेतृत्व में हजारों कर्मचारी करेंगे पैदल मार्च, 23 मार्च को दिल्ली में विशाल प्रदर्शन
देहरादून,05मार्च2025(आरएनएस) राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. पी. सिंह रावत के नेतृत्व में पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर 16 मार्च से ऐतिहासिक पैदल मार्च शुरू होगा। यह मार्च देहरादून के शहीद स्मारक से प्रस्थान करेगा और हरिद्वार, रुड़की, पुरकाजी, मुजफ्फरनगर, खतौली, मेरठ, मोदी नगर, मुरादनगर, गाजियाबाद व नोएडा होते हुए 23 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचेगा।
इस ऐतिहासिक 260 किलोमीटर के पैदल मार्च का उद्देश्य केंद्र सरकार का ध्यान पुरानी पेंशन बहाली की ओर आकर्षित करना है। बी. पी. सिंह रावत ने कहा कि देशभर के 85 लाख एनपीएस (न्यू पेंशन स्कीम) कार्मिकों का यह सबसे बड़ा आंदोलन होगा, क्योंकि केंद्र सरकार लगातार कर्मचारियों की इस मांग को नजरअंदाज कर रही है।
यूपीएस (यूनिफाइड पेंशन स्कीम ) का कड़ा विरोध
बी. पी. सिंह रावत ने केंद्र सरकार द्वारा 1 अप्रैल से लागू की जाने वाली यूपीएस यूनिफाइड पेंशन योजना को “काला कानून” करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर यह योजना इतनी अच्छी है, तो पहले विधायकों और सांसदों को इसके तहत लाया जाए। उन्होंने केंद्र सरकार पर जबरदस्ती यह योजना थोपने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे देशभर के कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पुलिसकर्मी और रेलवे कर्मचारी गहरे आक्रोश में हैं।
23 मार्च को दिल्ली में देशभर के कर्मचारी जुटेंगे
बी. पी. सिंह रावत ने ऐलान किया कि 23 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों कर्मचारी सरकार के खिलाफ विशाल विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस प्रदर्शन में उत्तराखंड सहित पूरे देश के सरकारी कर्मचारी अपने परिवार के साथ शामिल होंगे।
उत्तराखंड से प्रदेश प्रभारी विक्रम सिंह रावत दिल्ली जंतर-मंतर तक अधिक से अधिक कर्मचारियों को पहुंचाने के लिए घर-घर संपर्क अभियान चला रहे हैं। इस अभियान की जिम्मेदारी सीताराम पोखरियाल, मनोज कुमार अवस्थी, रंजिता विश्वकर्मा, राजीव उनियाल और विवेक सैनी को भी सौंपी गई है।
कर्मचारियों में भारी उत्साह, पूरी हुई तैयारियां
बी. पी. सिंह रावत ने कहा कि इस पैदल मार्च को लेकर कर्मचारियों में जबरदस्त जोश और उत्साह है। हर राज्य के कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल होने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्होंने कहा, “जब पुरानी पेंशन बहाली की आवाज सड़कों पर गूंजेगी, तो सरकार को झुकना ही पड़ेगा।”
अब देखना यह है कि सरकार इस ऐतिहासिक आंदोलन के दबाव में पुरानी पेंशन बहाली पर क्या निर्णय लेती है।

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