उत्तरांचल प्रेस क्लब में होली मिलन समारोह: लोकसंस्कृति और संगीत का रंगारंग उत्सव

देहरादून, 09 मार्च। उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित भव्य होली मिलन समारोह ने लोकसंस्कृति, संगीत और साहित्य के रंगों से समां बांध दिया। नव ज्योति सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था के कलाकारों, क्लब सदस्यों के परिवारों और पत्रकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।

समारोह का प्रमुख आकर्षण हमारी पहचान रंगमंच टीम द्वारा प्रस्तुत कुमाऊँ की खड़ी होली रही, जिसने पारंपरिक लोकसंस्कृति की छटा बिखेरी। उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत मनमोहन बटकोरा और संस्कृति विभाग के गणेश कांडपाल के सुमधुर गीतों ने माहौल को संगीतमय बना दिया और श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी और अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद नव ज्योति संस्था के कलाकारों ने गणेश वंदना प्रस्तुत कर सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया। गढ़वाली-कुमाऊंनी लोकनृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जबकि स्वर कोकिला संगीता ढौंडियाल और अजय जोशी की संगीतमय प्रस्तुति ने पूरे समारोह को संगीतमय बना दिया।

पत्रकारों और क्लब सदस्यों के परिवारों के बच्चों ने भी अपनी मोहक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोहा। साहित्यिक रंग जोड़ते हुए वीरेंद्र डंगवाल ‘पार्थ’ और लक्ष्मी प्रसाद बड़ोनी ने प्रभावशाली कविताएं प्रस्तुत कीं, वहीं राकेश खंडूड़ी की माउथ ऑर्गन की मधुर धुनों ने समां बांध दिया।

मुख्य अतिथि बंशीधर तिवारी ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज में कला और साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने उत्तरांचल प्रेस क्लब के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की निरंतरता पर बल दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रेस क्लब अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह कंडारी ने की, जबकि कुशल संचालन महामंत्री सुरेंद्र सिंह डसीला ने किया।

इस अवसर पर प्रेस क्लब के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अभिषेक मिश्रा, कनिष्ठ उपाध्यक्ष सुलोचना पयाल, कोषाध्यक्ष अनिल चंदोला, संयुक्त मंत्री अभय कैंतुरा और रश्मि खत्री, सम्प्रेक्षक शिवेश शर्मा, कार्यकारिणी सदस्य शूरवीर सिंह भंडारी, पंकज भट्ट, मो. असद, संदीप बडोला, योगेश रतूड़ी, रमन जायसवाल, दीपक बड़थ्वाल, किशोर रावत, मनबर सिंह रावत समेत कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

इस आयोजन ने न केवल होली के रंगों को जीवंत किया, बल्कि लोकसंस्कृति, संगीत और साहित्य के संगम से इसे यादगार बना दिया।

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