आत्मा कितनी बार जन्म लेती है — कलियुग का प्रभाव

हिन्दू अध्यात्म के अनुसार आत्माएं मरती नहीं, बल्कि बार-बार जन्म लेती हैं। ऐसे में मन में ये जिज्ञासा पैदा होना वाजिब है कि एक आत्मा कितनी बार जन्म लेती है, खासकर इस कलियुग में कोई आत्मा कितनी बार जन्म लेगी। अगर आपके मन में भी है ये सवाल, तो चलिए इसका जवाब समझने का प्रयास करते हैं।

हिन्दू धर्म के कई ग्रंथों में आत्मा और पुनर्जन्म की बात कही गयी है। इसलिये, हर आत्मा का लक्ष्य इस जन्म-मृत्यु के चक्र से बाहर आकर मोक्ष पाना है। लेकिन जब तक मोक्ष नहीं मिलता, आत्मा को इस संसार में अपने कर्मों को भोगने के लिए बार-बार जन्म लेना ही पड़ता है। ऐसे में मन में जिज्ञासा होती है कि एक आत्मा कम-से-कम कितनी बार जन्म लेती होगी? सवाल यह भी है कि हर युग में तो फिर भी कष्ट कम होगा लेकिन कलियुग में, जहां अधर्म अपने चरम पर होगा, इस युग में आत्मा को कष्ट भोगने के लिए कितनी बार आना होगा?

किसी आत्मा के जन्म लेने की घटना कई कारणों से प्रभावित होती है, जैसे कि उसके कर्म, युग और उस युग में मनुष्य की औसत उम्र। कर्मों के आधार पर किसी आत्मा की योनि तय होती है और ग्रंथों में लगभग 84 लाख योनि बताई गयी है। गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा 3 से 40 दिनों के भीतर नया जन्म ले सकती है। अगर सिर्फ मनुष्य योनि की बात की जाए, तो माना यह जाता है कि मनुष्य योनि में आत्मा लगभग 4 लाख बार जन्म ले सकती है। अब युग की बात करते हैं। धर्मग्रंथों में चार युग की बात की गयी है। हर युग में मनुष्य की औसत आयु अलग-अलग है। सतयुग और त्रेता युग में तो एक आदमी की औसत आयु हजारों वर्षों की होती थी और सतयुग 17 लाख 28 हजार वर्षों और त्रेतायुग 1,296,000 वर्षों का था। द्वापर युग 8,64,000 वर्षों का था, जिसमें एक व्यक्ति 1000 साल तक जी सकता था। इन सारे युगों में आत्मा के जन्म लेने की आवृत्ति कम होगी क्योंकि मनुष्यों की औसत आयु बहुत ज्यादा थी।

कलियुग कुल 4,32,000 वर्षों का है। यह चारों युगों में सबसे छोटा युग है। कलियुग में अब तक लगभग 5,100 से अधिक वर्ष बीत चुके हैं। इस युग में एक मनुष्य की औसत आयु 100 साल मानी गयी है, तो जानकारों का मानना है कि कलियुग में किसी भी आत्मा का जन्म लगभग 45 बार होता है। कलियुग को संघर्ष और मोह का युग माना जाता है, इसलिए आत्मा को बार-बार अवसर मिलता है कि वह धर्म और सत्य की ओर लौटे। हालांकि, कुछ जानकारों का मानना है कि कलियुग में अधर्म और अज्ञान बढ़ने से कर्म-बंधन बढ़ सकता है। कर्म-बंधन बढ़े तो पुनर्जन्म का चक्र लंबा खिंच सकता है। कलियुग जब समाप्त होगा, तो फिर से सतयुग शुरू होगा और आत्माएं जन्म लेंगी। कलियुग में इस बात की संभावना जरूर बढ़ जाती है कि कई आत्माएं अपने कर्मों को काटकर मोक्ष की ओर बढ़ चुकी होंगी क्योंकि कलियुग में कई आत्माएं कष्ट भोगेंगी।

कुछ जानकारों के अनुसार कुछ आत्माएं एक युग में केवल एक बार जन्म लेती हैं, जबकि कुछ आत्माएं कई बार जन्म लेती हैं और कुछ आत्माएं तो एक युग में एक बार भी जन्म नहीं लेती हैं। जन्म लेने की गणना आत्मा के कर्मों और चेतना की अवस्था पर भी निर्भर करता है।

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