अधिकांश हिंदू परिवारों के घर में पूजा के लिए एक छोटा मंदिर या देवस्थान होता है, जहां वे अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। भगवान की मूर्ति को घर में मंदिर के अलावा कहीं और नहीं रखना चाहिए। साथ ही, इसे इस तरह रखना चाहिए कि इसका पिछला भाग दिखाई न दे। मूर्ति का केवल अग्र भाग ही दिखाई देना चाहिए।मंदिर की सजावट, मूर्तियों और चित्रों की संख्या को लेकर धर्म एवं वास्तुशास्त्र में कुछ महत्वपूर्ण और पवित्र मान्यताएं हैं, जिनका पालन कर घर में शांति, समृद्धि और सौभाग्य बढ़ाया जा सकता है।
मंदिर में मूर्तियों की संख्या और प्रकार
- भगवान गणेश: घर में गणेश जी की मूर्तियां रखने से शुभता आती है। योग्य संख्या विषम होनी चाहिए जैसे 3, 5, 7 या 9। विषम संख्या शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का संकेत मानी जाती है।
- शिवलिंग: यदि शिवलिंग स्थापित है, तो उसका आकार अंगूठे से बड़ा नहीं होना चाहिए और एक से अधिक शिवलिंग मंदिर में न रखें। शिवलिंग को जल से भरे पात्र में स्थापित करना चाहिए, जिससे उसकी पवित्रता बनी रहती है।
- माता दुर्गा: मां दुर्गा और उनके स्वरूप जैसे माता काली की मूर्तियां तीन की संख्या में न रखें। तीन से कम या अधिक संख्या उपयुक्त मानी जाती है।
- हनुमान जी: भगवान हनुमान की मूर्ति हमेशा बैठे हुए मुद्रा में रखें। यह मुद्रा घर में सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति का संचार करती है।
- राम, जानकी और शिव परिवार: मंदिर में श्रीराम, जानकी माता और शिव परिवार के चित्र या मूर्तियां स्थापित करने से पारिवारिक सद्भाव और प्रेम बढ़ता है।
मंदिर की दिशा और स्थान
मंदिर को घर के उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में स्थापित करना चाहिए, जो वास्तुशास्त्र के अनुसार सबसे शुभ स्थान होता है। इसके अलावा मंदिर का मुख पूर्व दिशा में होना चाहिए। मंदिर को शयनकक्ष या बाथरूम के पास रखने से बचें, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा प्रभावित कर सकती है।
पूजा और समर्पण का महत्व
मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों या चित्रों की नियमित पूजा में श्रद्धा और भक्ति होनी चाहिए। प्रत्येक मूर्ति अथवा चित्र के लिए विशेष पूजा विधि का पालन करें और शुभ अवसरों पर विशेष आराधना करते रहें। ऐसा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
इस प्रकार, घर के मंदिर में मूर्तियों की संख्या, उनका आकार, दिशा और स्थान के साथ-साथ पूजा की विधि का धर्मशास्त्रीय और वास्तु विज्ञान दोनों दृष्टिकोण से ध्यान रखना आवश्यक है। इससे न केवल धार्मिक सन्दर्भ में संतुष्टि मिलती है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का वास होता है।
यह व्यवहार प्रत्येक परिवार के लिए आशीर्वाद और सद्भाव का मार्ग प्रशस्त करता है।
डिसक्लेमर :-
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