आईआईटी रुड़की के शोध: मोटे अनाज ब्रेड से बुरांश पेय तक, राज्यपाल ने की सराहना

देहरादून। लोक भवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर एवं डीन (अकादमिक) डॉ. नवीन के. नवानी और विजिटिंग प्रोफेसर डॉ. एच. सी. पोखरियाल ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने आम जनजीवन से जुड़े प्रमुख शोध कार्यों की जानकारी साझा की, जिनका फोकस बेहतर पोषण, सुरक्षित भोजन, किसानों की आय वृद्धि और पशुपालन सुधार पर है।

डॉ. नवानी ने बताया कि मोटे अनाजों से बने प्रोबायोटिक युक्त मिलेट ब्रेड स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने से यह मधुमेह रोगियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध हो सकता है। इसी क्रम में उन्होंने उत्तराखंड के बुरांश से तैयार स्वदेशी पेय ‘रोडोबूस्ट’ का जिक्र किया, जो आंतरिक स्वास्थ्य सुधार, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और खाद्य जनित रोगों से बचाव में मददगार है।

प्रोफेसरों ने स्थानीय लाखोरी मिर्च पर शोध का भी उल्लेख किया। इसमें प्राकृतिक रोगाणुरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो इसकी औषधीय व पोषण मूल्य को प्रमाणित करते हैं। इसके अलावा शहद की शुद्धता जांचने वाले शोध पर चर्चा हुई, जो उपभोक्ताओं को मिलावटी शहद से बचाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक होगा।

राज्यपाल ने इन व्यावहारिक शोधों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे जनोपयोगी अनुसंधान समाज, कृषि और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने शहद, मिलेट्स, बद्री तुलसी, पारंपरिक फसलों व स्थानीय उत्पादों पर आधारित शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

राज्यपाल ने आशा जताई कि आईआईटी रुड़की जैसे संस्थान राज्य व देश के समग्र विकास, पोषण सुरक्षा और सतत आजीविका के लिए मजबूत आधार तैयार करेंगे।

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