देहरादून । उत्तराखंड संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद की ओर से रिस्पना पुल, हरिद्वार बाइपास रोड स्थित सभागार में बुधवार को ‘अटल व्यक्तित्व एवं कृतित्व’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के उत्तराखंड राज्य निर्माण में योगदान, उनके कवि हृदय और सरल व्यक्तित्व को याद करते हुए भावुकता से कहा कि “आगामी पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के लिए अटल जी के आदर्शों को अपना जीवन मंत्र बनाना चाहिए।”
कार्यक्रम में आरएसएस के विशेष वक्ता प्रेम बडाकोटी ने जनसंघ से भाजपा तक के सफर को त्याग, बलिदान और आत्मनिर्भर भारत की भावना से जोड़ते हुए कहा कि अटल जी के विचार आज भी भारत की नीति-निर्देशक शक्ति हैं। वहीं विभाग प्रमुख गजेन्द्र खंडूरी ने कहा कि “स्वच्छ और मूल्यनिष्ठ राजनीति अटल जी का पहला और अंतिम लक्ष्य था। उन्होंने कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।”

कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना और मंगल गीत से हुआ। मीरा नवेली और राकेश जैन ने अटल जी की कविताओं का भावपूर्ण पाठ किया, जबकि महादेवी कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं ने ‘वंदे मातरम’ गीत प्रस्तुत कर माहौल देशभक्ति से भर दिया। बच्चों द्वारा कविताओं पर प्रस्तुत नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्ट ने आगामी सांस्कृतिक आयोजनों की जानकारी दी। वहीं पुनीत मित्तल, विजय स्नेही और डॉ. आदित्य कुमार ने अटल जी से जुड़े अपने पारिवारिक संस्मरण साझा किए, जिन्हें श्रोताओं ने भावनापूर्ण तालियों से स्वागत किया।
कार्यक्रम में रायपुर विधायक उमेश काऊ, सुभाष भड़थ्वाल, हरिश नारंग, साहित्यकार मुनेन्द्र, नीरज उनियाल, वंदना श्रीवास्तव, कंचन गुनसोला, आंदोलनकारी मनोज ध्यानी, स्कॉन के केशव भारती और आचार्य विपिन जोशी सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद, छात्र-छात्राएं एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संयोजन साधना शर्मा ने किया।


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