काउंटर-टेररिज्म पर अंतरराष्ट्रीय मंथन, पहली बार सह-अध्यक्षता करेगा भारत

नई दिल्ली ,१६ मार्च(आरएनएस)। आतंकवाद के खिलाफ भारत में महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक होने जा रही है। इस दौरान विभिन्न देश काउंटर टेररिज्म पर मंथन करेंगे। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह च्आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लसज् के एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप (ईडब्ल्यूजी) की १४वीं बैठक है। काउंटर टेररिज्म पर होने वाली यह बैठक १९ से २० मार्च, २०२५ तक नई दिल्ली में आयोजित होगी।
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह पहली बार है जब भारत एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप में काउंटर-आतंकवाद की सह-अध्यक्षता करेगा। इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और मलेशिया करेंगे। बैठक में शामिल होने के लिए आसियान के १० सदस्य देशों के डेलिगेशन भारत आ रहे हैं। इनमें ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, वियतनाम, सिंगापुर और थाईलैंड शामिल हैं।
वहीं, आठ संवाद भागीदार यानी ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, अमेरिका और रूस के प्रतिनिधियों के साथ ही टिमोर-लेस्ते और आसियान सचिवालय के सदस्य भी इसमें भाग लेंगे। १९ मार्च को भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह उद्घाटन समारोह के दौरान मुख्य भाषण देंगे।
यह बैठक २०२४-२०२७ के वर्तमान चक्र के लिए काउंटर-आतंकवाद पर एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप की गतिविधियों का पहला सत्र होगी। इस बैठक में आतंकवाद और उग्रवाद के विकसित हो रहे खतरों से निपटने के लिए एक मजबूत और व्यापक रणनीति पर चर्चा की जाएगी। बैठक का उद्देश्य आसियान और इसके संवाद भागीदारों के रक्षा बलों के अनुभवों को साझा करना है।
२०२४-२०२७ के वर्तमान चक्र के लिए यह कार्यक्रम योजनाबद्ध गतिविधियों, अभ्यासों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं की नींव रखेगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस, भागीदार देशों की रक्षा संस्थाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।
वर्तमान में यह सात प्रमुख सहयोग क्षेत्रों पर केंद्रित है। इनमें काउंटर-टेररिज्म, समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन, शांति रक्षा अभियान, सैन्य चिकित्सा और साइबर सुरक्षा शामिल हैं। इन क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप स्थापित किए गए हैं। हर एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप की सह-अध्यक्षता एक आसियान सदस्य देश और एक संवाद भागीदार द्वारा की जाती है, जो तीन साल के चक्र में काम करता है।
तीन साल के इस चक्र की शुरुआत में एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप के लिए उद्देश्य, नीति दिशानिर्देश और दिशा-निर्देश तय करना है। नियमित एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप बैठकों का आयोजन किया जाता है और कम से कम साल में दो बैठकें आयोजित की जाती हैं। तीसरे वर्ष में सभी सदस्य देशों के लिए विभिन्न प्रकार के अभ्यास आयोजित किए जाते हैं। इसमें टेबल-टॉप, मैदानी प्रशिक्षण, संचार प्रशिक्षण आदि का आयोजन करना शामिल है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि तीन साल के चक्र के दौरान व्यावहारिक सहयोग में की गई प्रगति का परीक्षण किया जा सके।

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