डॉ. दिलीप चौबे
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलिस्तीन में तबाही का शिकार गाजा के पुनर्निर्माण का जो प्रस्ताव रखा है, उसने दुनिया के विभिन्न देशों को चौंका दिया है।
पिछले पंद्रह महीनों से गाजा में जारी विनाश लीला में इन दिनों कुछ दिनों के लिए विराम लगा है तथा कुछ बंधकों की रिहाई का क्रम जारी है। आशा की जा रही थी कि शांति का यह सीमित समय एक दूरगामी संघर्ष विराम का रूप ले सकता है। इसी समय ट्रंप ने गाजा का अधिग्रहण कर वहां तथाकथित पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पेश किया है।
उन्होंने इजरायल के युद्ध पीपासु प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को पहले विदेशी नेता के रूप में व्हाइट हाउस आमंत्रित किया। इस मुलाकात के दौरान ही उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि वह गाजा को अपने नियंत्रण लेकर उसे एक ‘पर्यटन स्थल’ के रूप में विकसित करे। पचास हजार लोगों की मौत और लाखों लोगों के घायल होने वाले क्षेत्र को पर्यटन स्थल बनाने की बात कितनी मानवीय और अव्यावहारिक है, इसे लेकर सभी लोग स्तब्ध हैं। पूरा गाजा क्षेत्र खंडहर में तब्दील हो चुका है। सीमित संघर्ष विराम के दौरान लाखों लोग उत्तरी गाजा में अपने खंडहर बने मकानों को संजोने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय किसी भी विश्व नेता से यह आशा थी कि वह मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पीडि़त लोगों को नई शुरुआत करने का संदेश दे तथा यथासंभव मदद करे। लेकिन ट्रंप ने ठीक इसके विपरीत काम किया। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के वारंट के बावजूद नेतन्याहू अमेरिका के सम्मानित अतिथि बने। अपने मेजबान से उन्होंने गाजा के बारे में जो कुछ सुना वैसा कहने का दुस्साहस वह खुद नहीं पर पाए।
वास्तव में गाजा में पुनर्निर्माण का सुझाव पिछले वर्ष ट्रंप के दामाद जरेड कुशनर ने दिया था। उस समय गाजा में नरसंहार अपने प्रारंभिक दौर में था। धीरे-धीरे तबाही बढ़ती गयी। आज जब गाजा कई मायनों में कब्रिस्तान का रूप ले चुका है, उस समय गाजा को पर्यटन स्थल बनाने का सुझाव कोई जिम्मेदार राजनेता नहीं दे सकता। आश्चर्य की बात यह है कि चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप और उनके समर्थकों ने ऐसे बयान दिये थे कि नया प्रशासन दुनिया में संघर्ष शुरू करने की बजाय युद्ध का अंत करने को प्राथमिकता देगा। यह आशा बनी थी कि ट्रंप प्रशासन रूस और यूक्रेन पर दबाव डालकर वहां तीन साल से जारी युद्ध समाप्त कराने की कोशिश करेगा। इसी तरह फिलिस्तीन में इजरायल और हमास को भी संघर्ष समाप्त करने के लिए बाध्य किया जाएगा। लेकिन अब लगता है कि ट्रंप ने इजरायल को विनाश तांडव जारी रखने की हरी झंडी दिखा दी है। इतना ही नहीं, वह गाजा में सीधे रूप से अमेरिका की दखलंदाजी की भूमिका तैयार कर रहे हैं। ट्रंप की योजना यह है कि गाजा के लाखों लोगों को वहां से बेदखल कर पड़ोसी देशों मिस्र और जॉर्डन भेजा जाए।
गाजा क्षेत्र में मलवे की सफाई की जाए तथा दुनिया भर से निवेश आकषिर्त कर वहां नये भवनों का निर्माण किया जाए। डोनाल्ड ट्रंप मूलत: रियल एस्टेट कारोबारी रहे हैं। लगता है कि वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के नेता की बजाय अपने पुराने कारोबार की मानसिकता से काम कर रहे हैं। गाजा के पुनर्निर्माण में करीब एक दशक का समय लगेगा। क्या इतने समय तक कोई देश लाखों शरणार्थियों को अपने यहां आश्रय देने का बोझ उठाने के लिए तैयार होगा। फिलहाल तो मिस्र और जॉर्डन, दोनों ने फिलिस्तीनियों को अपने यहां आश्रय देने का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया है। चिंताजनक पहलू यह भी है कि ट्रंप ने खुल कर यह नहीं कहा है कि पुनर्निर्माण के बाद सभी फिलिस्तीनी लोगों को उनके अपने मूल स्थान पर बसाया जाएगा।
ट्रंप का कहना है कि गाजा एक ऐसा मुख्य स्थल बन जाएगा जहां दुनिया भर के लोग आकर रहेंगे। अमेरिका और इजरायल के पुराने रवैये को देखते हुए अनुमान लगाया जा सकता है कि नये गाजा में वास्तव में इजरायल के नागरिकों का ही बोलबाला हो जाएगा। पुनर्निर्माण की योजना बिना सैनिक मौजूदगी के संभव नहीं लगती। आशंका इस बात की है कि फिलिस्तीन कहीं अमेरिका के लिए नया वियतनाम न बन जाए।
इजरायल को विनाश तांडव जारी रखने की हरी झंडी
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