मुख्यमंत्री ने वीसी को वार्ता के दिए निर्देश, भवन स्वामियों को राहत की उम्मीद
देहरादून: मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) क्षेत्र में वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना लागू कराने को लेकर जन संघर्ष मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल सक्रिय हो गया है। मोर्चा अध्यक्ष एवं गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने एक-दो दिन पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट की और एमडीडीए क्षेत्र में ओटीएस योजना लागू करने का आग्रह किया।
नेगी ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि एमडीडीए क्षेत्र में भवन स्वामी कई प्रकार की समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिन भवन स्वामियों ने पूर्व में नक्शा पास नहीं कराया या फिर स्वीकृत नक्शे से अधिक निर्माण कर लिया, ऐसे तमाम मामलों में लोग काफी परेशान हैं। ओटीएस स्कीम लागू न होने के कारण वे अपने मामलों का निस्तारण नहीं करवा पा रहे हैं।
नेगी ने बताया कि वर्तमान स्थिति में एमडीडीए का चाबुक हमेशा भवन स्वामियों पर चलता रहता है, जिससे लोग बेबस हैं और डर के साये में जीने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यदि ओटीएस स्कीम लागू होती है तो इससे दोहरा लाभ होगा। एक ओर जहां सरकार को भारी मात्रा में राजस्व की प्राप्ति होगी, वहीं दूसरी ओर भवन स्वामियों को बड़ी राहत मिलेगी।
नेगी ने स्पष्ट किया कि हालांकि मामलों का कंपाउंड भी किया जा सकता है, लेकिन उस प्रक्रिया में भवन स्वामियों को काफी अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। ऐसे में भवन स्वामियों के लिए ओटीएस स्कीम ही सबसे सरल और कारगर विकल्प है। इससे लोगों को बिना अत्यधिक आर्थिक बोझ के अपने भवनों को वैध बनाने का अवसर मिल सकेगा।

प्रतिनिधिमंडल की मांग पर गंभीरता दिखाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एमडीडीए के उपाध्यक्ष (वीसी) को इस संबंध में वार्ता करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के इस सकारात्मक रुख से भवन स्वामियों में उम्मीद की लहर दौड़ गई है। अब एमडीडीए प्रशासन से वार्ता के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि ओटीएस स्कीम कब लागू होगी और इसके दायरे में किन मामलों को शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के अलावा मोर्चा के अध्यक्ष अमित जैन भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से ओटीएस स्कीम को शीघ्र लागू करने का आग्रह किया ताकि एमडीडीए क्षेत्र के सैकड़ों भवन स्वामियों को राहत मिल सके।

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