देहरादून। सोमवार को ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में जिलाधिकारी सविन बसंल ने आम जनता की समस्याएँ सुनीं और मौके पर कई मामलों में त्वरित समाधान के निर्देश दिए। कुल 176 शिकायतों में से कुछ गंभीर व संवेदनशील मामले — बैंक धोखाधड़ी, बुजुर्गों की पेंशन, भू कब्जा, भरण-पोषण, आर्थिक सहायता, ऋण माफी, स्वास्थ्य व आवास जैसे मुद्दे शामिल थे, जिनमें से कई पर तत्काल कार्रवाई हुई। यह जानकारी स्वयं जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी प्रेस नोट में दी गई।
मुख्य शिकायतें और त्वरित कार्रवाई
93 वर्षीय असमर्थ बुजुर्ग प्रेम सिंह की शिकायत पर — उनकी ही बेटी द्वारा बैंक खाते से 10 लाख रुपये निकालने का आरोप पाया गया। जिलाधिकारी ने लीड बैंक अधिकारी को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
पत्नी की मौत के बाद आर्थिक तंगी झेल रही विधवा नेहा ने 5 लाख ऋण माफी की गुहार लगाई — बैंक किस्तों का व्यवस्थित भुगतान करने के बावजूद अनियमितताओं की शिकायत मिली। अधिकारियों को मामले की सत्य-पड़ताल व राहत देने हेतु कहा गया।

70 वर्षीय बुजुर्ग इन्दु राजवंशी समेत दिव्यांग व अन्य महिलाओं — जिनमें रेखा देवी, एकादशी देवी, पिंकी देवी आदि शामिल हैं — को पेंशन, आर्थिक सहायता व दिव्यांग प्रमाण पत्र दिलाने के निर्देश दिये गये।
एक बुजुर्ग महिला का आरोप था कि बेटी ने पति की मृत्यु के बाद फर्जी वसीयतनामा बनाकर घर व बैंक खाता हड़प लिया — भरण-पोषण अधिनियम के तहत वाद दायर करने और मामले की विधिक पुनः जांच कराने के आदेश दिये गये।
कुछ शिकायतें भू-कब्जा, अवैध जमीन रजिस्ट्री व झुग्गी-झोपड़ी, कच्चे मकान ध्वस्तीकरण, अवैध मस्जिद/मदरसा, पेड़ों की कटाई व अन्य स्थानीय विवादों से संबंधित थीं — जिलाधिकारी ने संबंधित तहसीलदार, एसडीएम, नगर आयुक्त व अन्य विभागीय अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिये।
दुर्घटना, पिछड़ा स्वास्थ्य, आवास व आर्थिक कठिनाई झेल रही कई महिलाओं को भी आर्थिक व सहायतात्मक राहत दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

जिलाधिकारी सविन बसंल ने कहा कि उनका उद्देश्य जनता के सामने सिर्फ सुनना नहीं, बल्कि जनभावना अनुरूप त्वरित व पारदर्शी समाधान प्रदान करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शिकायतों को “उच्च प्राथमिकता” पर लेकर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
प्रसिद्ध है कि जनता दर्शन कार्यक्रम निष्पक्षता, संवेदनशीलता और शासन-जनता संवाद का माध्यम बन चुका है। ऐसे आयोजनों से केवल समस्याएँ उजागर नहीं होतीं, बल्कि उनका तत्काल हल भी सुनिश्चित होता है।
इस व्यापक जनदर्शन एवं तत्-कालीन कार्रवाई ने पुनः यह साबित कर दिया कि ज़मीनी-स्तर पर प्रशासन जनहित के प्रति सचेत है। चाहे वह बुजुर्गों की पेंशन हो, आर्थिक सहायता, भूमि विवाद हो या सामाजिक न्याय — आम जनता के लिए “ऐक्शन” का वचन अब केवल काग़ज़ पर नहीं, बल्कि हकीकत में बदल रहा है।

आने वाले दिनों में अपेक्षा की जाती है कि ऐसे संवाद व राहत शिविर जन-विश्वास को मजबूत करेंगे और उम्मीदों को नई दिशा देंगे।

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