साल की पहली पूर्णिमा: तिथि, स्नान और दान का महत्व

हिंदू धर्म में पौष पूर्णिमा का व्रत का खास महत्व होता है। इस शुभ तिथि पर व्रत और विधि-विधान से पूजा करने से व्रती को बेहद पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पौष पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने का बड़ा विधान है। पौष पूर्णिमा के अगले दिन स्नान, दान आदि कार्य करने से जीवन में सभी प्रकार के सुख प्राप्त हो सकते हैं।

देवताओं का मिलता है आशीर्वाद

पौराणिक कथाओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा का व्रत करने से भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। पौष पूर्णिमा वाले दिन स्नान करने से देव-विमान में बैठकर विहार करने के योग्य हो जाता है। इस स्नान का पुण्य अर्जित करने वाले पुण्यात्मा स्वर्ग में विहार करते हैं, ऐसी हिन्दुओं की धार्मिक मान्यताएं हैं। पौष पूर्णिमा पर व्रत रखने वाले जातक अगर संगम में स्नान करें तो उन्हें देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इन चीजों का करें दान

ज्योतिषों के अनुसार, व्रत वाले दिन प्रातःकाल नदी आदि में स्नान करके देवताओं का पूजन एवं पितृों का तपृण करना चाहिए, सफेद चन्दन, चावल, सफेद फूल, धूप-दीप, सफेद वस्त्र आदि से चन्द्रमा का पूजन करें, तो चलिए जानते हैं कि साल 2026 में पौष पूर्णिमा का व्रत किस दिन रखा जाने वाला है और इससे जुड़े कुछ सरल उपाय…

पौष पूर्णिमा 2026 कब है?

ज्योतिष की माने तो पौष माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत आज यानी 2 जनवरी की शाम 6 बजकर 54 मिनट से होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 3 जनवरी, शनिवार शाम के वक्त 5 बजकर 35 मिनट पर होगा। ऐसे में पौष पूर्णिमा का व्रत आज यानी 2 जनवरी को किया जाएगा, तो वहीं, स्नान-दान का शुभ समय 3 जनवरी को रहेगा।

जानें, स्नान दान और शुभ मुहूर्त

कहते हैं कि पूर्णिमा व्रत के अगले दिन 3 जनवरी, शनिवार के दिन सुबह के समय 7 बजकर 30 मिनट तक स्नान, दान आदि कार्य करना सबसे उत्तम रहेगा। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि के दिन स्नान और दान का खास महत्व होता है। ऐसा करने से जातक को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है। साथ ही, पापों से भी मुक्ति मिलेगी।

पौष पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा को हिंदू धर्म में विशेष पुण्य तिथि माना गया है। इस शुभ अवसर पर व्रत, स्नान और दान करने का बड़ा महत्व माना गया है। ऐसा करने से व्यक्ति के पापों की क्षमा होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। कहते हैं कि गंगा, यमुना, सरस्वती या किसी भी पवित्र जल स्रोत में स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा और जरूरतमंदों को दान करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

ज्योतिषों के अनुसार, साल 2026 में यह पावन पूर्णिमा 3 जनवरी, 2026 को पड़ने वाली है। इस दिन व्रत और पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है, आत्मबल बढ़ता है. साथ ही इस दिन किए गए पुण्य कर्मों से पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है।

अस्वीकरण (Disclaimer)
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