देहरादून। उत्तराखंड का अंकिता भंडारी हत्याकांड न्याय की आस पर टिका हुआ है। होटल मालिक पुलकित आर्य व दो सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई जांच की सिफारिश तो हो गई, मगर पीड़िता परिवार व आंदोलनकारियों का गुस्सा शांत नहीं। ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ ने 8 फरवरी को देहरादून के परेड ग्राउंड में ‘वीआईपी कौन? महापंचायत’ बुलाई है। लोकप्रिय लोकगायक ‘गढ़रत्न’ नरेंद्र सिंह नेगी ने इसे समर्थन देते हुए भावुक अपील की— “अंकिता तैं न्याय दिलाना का वास्ता, आप सभी संघर्ष में शामिल हों। यह उत्तराखंड की आत्मा, अस्मिता व पहाड़ी बेटियों के सम्मान की लड़ाई है।”
नेगी ने कहा, “अगर आज अन्याय के खिलाफ एकजुट न हुए तो कल हर बेटी असुरक्षित महसूस करेगी। शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक तरीके से महापंचायत में पहुंचें।” मंच ने इसे वीआईपी संस्कृति के खिलाफ जनाक्रोश का मंच बताया। संयुक्त संघर्ष मंच के मोहित डिमरी ने तीखा प्रहार किया— “सरकार भ्रम फैला रही कि राजनीति हो रही। क्या न्याय की मांग अपराध है? दोषियों को सजा व परिवार को न्याय तक हम रुकेंगे नहीं।”
बता दे कि 18 सितंबर 2022 को अंकिता की हत्या के बाद राज्य सड़कों पर उतर आया। शहीद स्मारक की 15 जनवरी बैठक में महापंचायत का फैसला हुआ, जहां वीआईपी खुलासे व बचावकर्ताओं पर निशाना साधा गया। अब राज्य भर में जनसंपर्क अभियान जोरों पर है। मंच दावा कर रहा— हजारों जुटेंगे। नेगी का समर्थन आंदोलन को नई ऊर्जा दे रहा।
यह महापंचायत उत्तराखंड की राजनीतिक व सामाजिक चेतना की कसौटी बनेगी ? क्या सरकार सुनेगी या आंदोलन और तेज होगा?

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