काशीपुर कांड: यशपाल आर्य ने धामी सरकार को बताया ‘किसान विरोधी’

देहरादून। उत्तराखंड के काशीपुर में एक युवा किसान द्वारा आत्महत्या किया जाना धामी सरकार की निर्दयी, संवेदनहीन और किसान-विरोधी व्यवस्था का सबसे भयावह प्रमाण है। यह केवल आत्महत्या नहीं है, बल्कि पुलिस-प्रशासन की प्रताड़ना और सत्ता के अहंकार द्वारा एक मजबूर किसान की हत्या है।

उत्तराखंड कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आज कांग्रेस मुख्यालय में मौजूद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि —
“कितना लाचार, मजबूर और बेबस रहा होगा वह जवान किसान, जिसके सामने पुलिस ने न्याय के सारे दरवाजे बंद कर दिए। कितना उत्पीड़न, कितनी प्रताड़ना और कितना मानसिक आतंक झेलना पड़ा होगा कि उसे अपनी जीवन लीला समाप्त करनी पड़ी।”

आर्य ने कहा कि इस घटना से एक पूरा परिवार उजड़ गया, घर का चिराग बुझ गया, मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया छिन गया और एक सुहागन की मांग उजड़ गई। यह सिर्फ एक किसान की मौत नहीं है, बल्कि धामी सरकार की अमानवीय नीतियों का परिणाम है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार द्वारा केवल चौकी प्रभारी समेत कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर देना इस जघन्य अपराध पर पर्दा डालने की कोशिश है। यह कार्रवाई पूरी तरह नाकाफी है।

यशपाल आर्य ने मांग की:

  1. इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए।
  2. दोषी पुलिस अधिकारियों पर हत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज हो।
  3. मृतक किसान के परिवार को तत्काल 50 लाख रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
  4. किसान उत्पीड़न में लिप्त अधिकारियों को तत्काल बर्खास्त किया जाए।
    आर्य ने कहा कि धामी सरकार में किसान सुरक्षित नहीं है, न्याय की कोई गारंटी नहीं है और पुलिस सत्ता के इशारों पर निर्दोषों को कुचलने का काम कर रही है।

“उत्तराखंड कांग्रेस इस किसान के परिवार को न्याय दिलाने के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी और दोषियों को बेनकाब कर के रहेगी।”

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