थानो के रामनगर डांडा में विवादित भूमि प्रकरण को लेकर लक्ष्मण सिंह ने पुनः न्यायालय की शरण ली ।

विवादित भूमि प्रकरण को लेकर लक्ष्मण सिंह एवं उनके परिवार ने प्रेस वार्ता में अपनी व्यथा सुनाई।

देहरादून। थानो के रामनगर डांडा में विवादित भूमि प्रकरण को लेकर लक्ष्मण सिंह एवं उनके परिवार ने आज उत्तरांचल प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर अपनी बात कहीं। प्रेस को संबोधित करते हुए थानो क्षेत्र के रामनगर डांडा निवासी लक्ष्मण सिंह ने अपनी पैतृक भूमि से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद को लेकर वर्ष 2026 में पुनः न्यायालय में वाद दायर किया है कि बात कहीं। लक्ष्मण सिंह का आरोप है कि उनके पूर्वजों के कब्जे वाली फार्मिंग सोसायटी की भूमि पर उनका परिवार वर्ष 1952 से निरंतर खेती-बाड़ी एवं कब्जे में रहा है।

लक्ष्मण सिंह के अनुसार उक्त भूमि पर उनके परिवार का दशकों से वास्तविक कब्जा रहा है, किंतु वर्ष 2013 में कथित रूप से अनियमित एवं फर्जी तरीके से इस भूमि का विक्रय संजीव गुप्ता के पक्ष में कर दिया गया। उनका कहना है कि विक्रय के समय भूमि पर उनके परिवार का कब्जा विद्यमान था और भूमि के स्वामित्व एवं कब्जे से संबंधित तथ्यों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने बताया कि इस मामले में उनके पिता स्वर्गीय संतराम द्वारा वर्ष 2017 में न्यायालय में वाद दायर किया गया था। दुर्भाग्यवश मुकदमे की कार्यवाही के दौरान ही उनके पिता का निधन हो गया, जिसके कारण प्रकरण आगे प्रभावी रूप से नहीं बढ़ सका।

अब वर्ष 2026 में लक्ष्मण सिंह ने स्वयं न्यायालय की शरण लेते हुए भूमि से संबंधित अपने अधिकारों की रक्षा एवं न्याय की मांग की है। उन्होंने संबंधित राजस्व अभिलेखों, कब्जे के साक्ष्यों तथा अन्य दस्तावेजों के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।

लक्ष्मण सिंह का कहना है कि उनका परिवार पिछले सात दशकों से अधिक समय से उक्त भूमि पर काबिज है और न्यायालय से उन्हें पूर्ण न्याय मिलने की आशा है। उन्होंने प्रशासन से भी अनुरोध किया है कि विवादित भूमि की स्थिति को यथावत बनाए रखते हुए किसी भी प्रकार के अतिक्रमण अथवा निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।

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