लक्ष्मीपुर विवाद पर पड़ा विराम: सिंचाई विभाग की ज़मीन पर कटान, ग्राम समाज की ज़मीन पर आरोप झूठे साबित

संयुक्त निरीक्षण में खुलासा — तहसील प्रशासन पर लगाए गए आरोप निराधार निकले

ग्राम समाज की भूमि पर पेड़ों की कटाई की पुष्टि नहीं, अफवाहें फैलाने वालों पर उंगली

विकासनगर/देहरादून (हमारी चौपाल) लक्ष्मीपुर ग्राम पंचायत की भूमि और पेड़ कटाई को लेकर बीते दिनों उठा विवाद अब नई स्थिति में पहुँच गया है। 3 अक्टूबर को पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग और तहसील प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके का निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में सिंचाई विभाग की ज़मीन पर पेड़ काटे जाने की पुष्टि हुई, जबकि ग्राम समाज की भूमि पर किसी भी तरह की कटाई नहीं पाए जाने की बात स्पष्ट की गई।

कल तक सवालों में था प्रशासन
याद रहे कि कल तक पूरा मामला प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा था। पहली पेमाईश में सरकारी ज़मीन सामने न आने और बाद में पाँच मीटर भूमि को सरकारी घोषित करने पर गंभीर संदेह जताए गए थे। ग्रामीणों और पूर्व प्रधान यासीन अंसारी ने अधिकारियों पर मिलीभगत और लकड़ी हटवाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

संयुक्त निरीक्षण का नतीजा
आज हुए निरीक्षण में तस्वीर साफ हो गई। सिंचाई विभाग ने अपनी ज़मीन नोटिफाई करते हुए स्वीकार किया कि उनकी भूमि पर कुछ पेड़ कटे हैं। लेकिन तहसील प्रशासन और ग्राम समाज की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया कि ग्राम समाज की भूमि पर कोई पेड़ नहीं काटा गया है।

आरोपों का खंडन
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों और शिकायतकर्ता ने स्वयं माना कि तहसीलदार और राजस्व अधिकारियों पर लगाए गए आरोप निराधार थे। शिकायतकर्ता ने यह भी साफ किया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने समाज में प्रशासन की छवि धूमिल करने के लिए गलत अफवाहें फैलाई थीं। यहां तक कि शिकायतकर्ता को पैसे दिए जाने की खबर भी झूठी साबित हुई, क्योंकि इसका कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है।

तहसीलदार का बयान
तहसीलदार विवेक राजौरी ने कहा कि शुरुआत से ही तहसील प्रशासन ने निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पैमाईश की है। उन्होंने दोहराया कि यदि किसी विभाग की ज़मीन पर अतिक्रमण या अवैध कटाई पाई जाती है तो उसे सरकारी संपत्ति की चोरी माना जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नतीजा
इस संयुक्त निरीक्षण ने यह साफ कर दिया है कि—
ग्राम समाज की भूमि पर कोई कटाई नहीं हुई।
केवल सिंचाई विभाग की ज़मीन पर पेड़ काटे जाने की पुष्टि हुई।
तहसील प्रशासन पर लगे सभी आरोप असत्य और निराधार निकले।

अब देखना यह है कि सिंचाई विभाग अपनी भूमि पर पेड़ कटान के मामले में क्या कानूनी कदम उठाता है।

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