रघुनाथ नेगी के नेतृत्व में जन संघर्ष मोर्चा ने सीएम से की आंदोलनकारी चिन्हीकरण में ढील की मांग

देहरादून। राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की लंबित मांग को लेकर जन संघर्ष मोर्चा का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिला। मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में गए इस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष चिन्हीकरण के मौजूदा मानकों में ढील देने और प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने इस मामले में गृह सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे नेगी ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि सरकार द्वारा निर्धारित वर्तमान चिन्हीकरण के मानक इतने जटिल हैं कि प्रदेश में हजारों ऐसे कर्मठ राज्य आंदोलनकारी आज भी चिन्हित होने से वंचित रह गए हैं, जिन्होंने उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

रघुनाथ नेगी ने बताया कि राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान अधिकांश लोगों ने अपने साथ हुई घटनाओं के दस्तावेज या प्रमाण पत्र संभाल कर नहीं रखे थे। उस समय किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक दिन राज्य बनने के बाद इन दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा, उस दौर में पुलिस, प्रशासन और अभिसूचना विभाग ने भी मुख्य रूप से चर्चित या खास चेहरों के ही नाम अपने रिकॉर्ड में दर्ज किए। पहचान न होने के कारण आंदोलन में शामिल हजारों अन्य लोगों के नाम सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बन पाए।

नेगी के अनुसार, चिन्हीकरण से वंचित अधिकांश आंदोलनकारी आज भी इस आस में बैठे हैं कि उन्हें उनके योगदान के लिए सरकारी मान्यता मिले। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये लोग केवल पेंशन या आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सम्मान पाने के लिए चिन्हित होना चाहते हैं। “हम सिर्फ सम्मान पाने के लिए चिन्हित होना चाहते हैं, न कि पेंशन पाने के लिए,” रघुनाथ नेगी ने आंदोलनकारियों की इस भावना को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि राज्य निर्माण के इन वीर सपूतों के सम्मान को देखते हुए चिन्हीकरण के नियमों में शिथिलता बरती जाए और उन आंदोलनकारियों को भी चिन्हित किया जाए जो दस्तावेजी प्रमाण के अभाव में वंचित रह गए हैं। मुख्यमंत्री धामी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गृह सचिव को इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस मामले में सकारात्मक पहल हो सकती है, जिससे हजारों राज्य आंदोलनकारियों को उनके लंबे इंतजार के बाद सम्मान मिल सकेगा।

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