पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिलकर मांगा समर्थन, प्रदर्शनकारियों ने उठाई न्याय की आवाज
नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड के LUCC (लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी) घोटाले के खिलाफ आवाज उठाने वाली सरस्वती देवी और उनके साथियों का संघर्ष आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर चरम पर पहुंच गया। श्रीनगर गढ़वाल से सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा कर राजधानी पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप के नेतृत्व में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
गढ़वाल हिमालय से निकलकर दिल्ली की सड़कों तक पहुंची इस पदयात्रा ने LUCC घोटाले को एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। सरस्वती देवी, जो पिछले कई महीनों से इस मामले में पीड़ितों की आवाज बुलंद कर रही हैं, ने अपने समर्थकों के साथ जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर लिखा था, “LUCC पीड़ितों को न्याय दो”, “राष्ट्रपति हस्तक्षेप करो” और “भ्रष्टाचारियों पर गाज गिराओ”।
इस अवसर पर कांग्रेस उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व करते हुए कहा कि LUCC घोटाला उत्तराखंड के इतिहास का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला है, जिसमें गरीब किसानों और भूमिहीन मजदूरों के साथ धोखा हुआ है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि राज्य के ग्रामीण अर्थतंत्र पर सीधा वार है। हम सड़क से लेकर संसद तक इन पीड़ितों की आवाज बुलंद करते रहेंगे।”
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च करने की भी कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर पर ही रोके रखा। बाद में प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें LUCC घोटाले की स्वतंत्र जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

प्रदर्शन के बाद सरस्वती देवी और उनके साथी पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत से मिलने पहुंचे। हरीश रावत ने प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाया और उन्हें हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, “LUCC घोटाले ने उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों को हिलाकर रख दिया है। कांग्रेस हमेशा पीड़ितों के साथ खड़ी है और इस माममले को संसद में भी उठाया जाएगा।”
इस अवसर पर पूर्व कांग्रेसी संयुक्त सचिव हरिपाल रावत, राज्य आंदोलनकारी अनिल पेंट, वरिष्ठ पत्रकार कुशल जीना, सुरेंद्र खंडूरी, सत्येंद्र रावत, सोशल एक्टिविस्ट अनिल पत, प्रताप थलवाल, सुनील नेगी के अलावा उत्तराखंड से आए बड़ी संख्या में LUCC पीड़ित और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।
क्या है LUCC घोटाला?
LUCC (लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी) घोटाला उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में भूमि आवंटन और उपयोग से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला है। 500 करोड़ के इस चिटफंड घोटाले ने हजारों परिवारों की जमा पूंजी को निगल लिया है, जिससे महिलाओं, सिंगल मदर, रिटायर्ड सैनिकों और सामान्य निवेशकों की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुकी है। आरोप है कि इसमें करोड़ों रुपये के गबन के साथ गरीब किसानों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए उनकी जमीन से बेदखल किया गया। यह मामला कई वर्षों से राजनीति गर्माए हुए है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे और देशभर के अन्य हिस्सों में भी इस मुद्दे को लेकर जनजागरण अभियान चलाएंगे।

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