चिन्हीकरण, आश्रितों के लिए नियमावली बनाने की मांग के लिए सचिवालय कूच

देहरादून । चिन्हीकरण और क्षैतिज आरक्षण में आश्रितों के लिए नियमावली बनाने की मांग को लेकर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच ने बुधवार को सचिवालय कूच किया। पुलिस ने पुलिस मुख्यालय से पहले ही आंदोलनकारियों को बैरीकैडिंग पर रोक दिया। मंच ने मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।

राज्य आंदोलनकारी मंच के आंदोलनकारी पूर्व घोषित ऐलान के तहत बुधवार को गांधी पार्क के बाहर एकत्र हुए और वहां से नारेबाजी करते हुए सचिवालय कूच के लिए बढ़े। आंदोलनकारियों का कहना था कि राज्य सरकार ने आंदोलनकारियों के लिए दस फीसदी क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान किया, जिसके फलस्वरुप काफी राज्य आंदोलनकारी अनेक सेवाओं के लिए परीक्षा पास कर चुने गए। हाल ही में यूकेएसएसएससी आयोग ने समूह ग और पुलिस की भर्ती के लिए चयनित राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों के परीक्षा फल घोषित नहीं किए। आयोग का ये कहना है कि उनका आश्रित का प्रमाण पत्र विज्ञप्ति के बाद का है। आंदोलनकारियों का तर्क था कि शासन ने प्रमाण पत्र जारी करने के दिशा निर्देश 24 नवंबर 2024 को दिए तो प्रमाण पत्र भी उसके बाद ही बनेंगे। आयोग के इस निर्णय पर हठधर्मिता नजर आती है। राज्य आंदोलनकारियों की चिन्हीकरण प्रक्रिया में देरी होने एवं क्षैतिज आरक्षण के जीओ का पालन न होने समेत अन्य बिन्दुओं को लेकर आंदोलनकारियों ने आक्रोश जताया।

प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, अरुणा थपलियाल ने कहा कि मुख्यमन्त्री की घोषणा के बाद भी शासनादेशों का पालन नहीं हो रहा हैं और ना ही चयनित राज्य आंदोलनकारी आश्रितों को क्षैतिज आरक्षण का लाभ मिल पा रहा हैं। शासनादेश का 05-माह बाद भी पालन नहीं किया जा रहा हैं, जिससे प्रदेश के शहीद परिजनों के साथ ही तमाम राज्य आंदोलनकारियों मॆं रोष व्याप्त हैं।

प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती एवं महासचिव रामलाल खंडूड़ी, युद्धवीर चौहान ने कहा कि इतने लम्बे अरसे के बाद सरकार की लेटलतीफी से प्रत्येक कार्य में अवरोध पैदा हो रहा है। सरकार के पास अपने एजेंडे के लिए काम करने का तो समय है लेकिन आंदोलनकारियों की समस्याओं की ओर उनका ध्यान नहीं है। रामेश्वरी देवी, रुकम पोखरियाल ने कहा कि जहां भी राज्य आंदोलनकारियों की सरकारी सेवा लगी थी वह आयु सीमा की वजह से बेहद कम अवधि के लिए थी। ऐसे में आश्रितों को भी लाभ की श्रेणी में लेने की मांग की गई थी। लिहाजा सरकार को आश्रितों के लिए भी नियमावली बनानी चाहिए।

मौके पर मोहन खत्री, पूरण सिंह लिंगवाल, केशव उनियाल, मनोज नौटियाल, बीडी बौंठियाल, हरि सिंह मेहर, अनुज नौटियाल, विरेन्द्र सिंह रावत, दीपक बिष्ट, राकेश कांडपाल, संजय बलूनी, सुलोचना भट्ट, गणेश डंगवाल, राम लाल खंडूड़ी, सुलोचना मैंदोला, रेवती बिष्ट, कल्पेश्वरी नेगी, राजेश पांथरी, आशा डंगवाल, मोनिका लखेड़ा, क्रांति अभिषेक मौजूद रहे।

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