मैक्स अस्पताल देहरादून ने 190 किलो वजन वाली महिला को बैरिएट्रिक सर्जरी से दी नई जिंदगी

देहरादून।  मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और उपलब्धि हासिल करते हुए 41 वर्षीय महिला पर सफल बैरिएट्रिक सर्जरी की है। 190 किलो वजन से जूझ रही इस महिला को डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी है। लंबे समय से मोटापे और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान इस महिला की सर्जरी ने न सिर्फ उसके जीवन को आसान बनाया है, बल्कि अन्य मरीजों के लिए भी आशा की किरण जगाई है।

इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी का नेतृत्व डॉ. विशाल निधि कुलश्रेष्ठ, एसोसिएट डायरेक्टर – जीआई, एमएसएस एवं बैरिएट्रिक सर्जरी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून ने किया। उन्होंने बताया कि मरीज का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 69 था, जो सामान्य से कई गुना अधिक है। अत्यधिक मोटापे की इस स्थिति में भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का खतरा और बढ़ जाता। ऐसे में बैरिएट्रिक सर्जरी ही सबसे सुरक्षित उपाय था।

डॉ. कुलश्रेष्ठ ने जानकारी दी कि सर्जरी में पेट का आकार छोटा कर दिया जाता है और आंतों का एक हिस्सा बायपास किया जाता है, जिससे भोजन की मात्रा और उसका अवशोषण दोनों कम हो जाते हैं। नतीजतन, मरीज का वजन तेज़ी से घटता है और स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि सर्जरी पूरी तरह सफल रही और ऑपरेशन के तीसरे ही दिन महिला को छुट्टी दे दी गई।

डॉक्टरों के अनुसार, महिला का वजन पहले हफ्ते में ही 10 किलो तक कम हुआ और आने वाले महीनों में करीब 80 किलो तक वजन घटने की उम्मीद है। इस प्रक्रिया के बाद मरीज को बैरिएट्रिक डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव अपनाना जरूरी है।

सर्जरी की लागत और सफलता दर पर पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए डॉ. कुलश्रेष्ठ ने कहा कि, “बैरिएट्रिक सर्जरी की सफलता दर लगभग 80% है। जहां तक लागत की बात है, तो यह 3 लाख से 6.5 लाख रुपये तक आ सकती है। हालांकि, अंतिम खर्च मरीज की स्थिति और उसकी आवश्यकताओं पर निर्भर करता है।”

विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा भारतीय खानपान और जीवनशैली से गहराई से जुड़ा है। कार्बोहाइड्रेट और वसा से भरपूर आहार, प्रोटीन की कमी और शारीरिक निष्क्रियता इस समस्या को और गंभीर बना देते हैं। ऐसे में बैरिएट्रिक सर्जरी मोटापे के चक्र को तोड़ने का सबसे सुरक्षित और कारगर तरीका माना जा रहा है।

मैक्स अस्पताल देहरादून की इस उपलब्धि ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के बल पर असंभव लगने वाली चुनौतियों को भी सफलता में बदला जा सकता है।

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