देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर भारतीय युवा कांग्रेस ने एक बार फिर सरकार और जांच एजेंसियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रविवार को कांग्रेस भवन में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने राज्य सरकार पर साक्ष्यों को मिटाने और प्रभावशाली लोगों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया। इस अवसर पर देशव्यापी सामाजिक आंदोलन “#MeBhiAnkita” अभियान का भी औपचारिक आगाज किया गया।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तराखंड प्रभारी सुरभि द्विवेदी ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड ने देवभूमि की आत्मा को झकझोर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के तुरंत बाद जिस तरह आनन-फानन में रिसॉर्ट के कमरे को ध्वस्त किया गया, वह कोई अतिक्रमण हटाओ अभियान नहीं बल्कि महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्यों को मिटाने की एक सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार ने उस स्थान को सील करने के बजाय बुलडोजर चलाना क्यों जरूरी समझा?
राष्ट्रीय सचिव हरनीत कौर ने जांच प्रक्रिया पर संदेह जताते हुए कहा कि यह प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है कि इस मामले में पीड़ित माता-पिता की शिकायत के बजाय किसी तीसरे पक्ष की शिकायत पर CBI जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पीड़ित परिवार की आवाज को दबाने और जांच को भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।
युवा कांग्रेस ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए “#MeBhiAnkita” डिजिटल अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत महिलाएं सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद करेंगी। सुरभि द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि अंकिता अब केवल एक नाम नहीं बल्कि अन्याय के खिलाफ लड़ रही हर बेटी का प्रतीक है। यह अभियान सरकार पर नैतिक दबाव बनाएगा ताकि दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुँचाया जा सके।
प्रेस वार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के महिलाओं के प्रति दिए गए पुराने बयानों का हवाला देते हुए सत्तापक्ष की मानसिकता पर भी प्रहार किया गया। यूथ कांग्रेस ने मांग की कि जब तक जांच के दायरे में पर्दे के पीछे छिपे तमाम ‘प्रभावशाली’ लोग नहीं आते, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
इस दौरान प्रदेश मीडिया चेयरमैन देवेश उनियाल, प्रदेश उपाध्यक्ष सौरभ ममगाईं, उपाध्यक्ष स्वाति नेगी और महानगर अध्यक्ष मोहित मेहता सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एकसुर में कहा कि अंकिता को न्याय दिलाना केवल एक परिवार की नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के स्वाभिमान की लड़ाई है।

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